भारत का निर्यात जून में 9.71 फीसदी घटा

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इस साल जून में भारत का निर्यात 25.01 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल 2018 के जून महीने में देश का निर्यात 27.70 अरब डॉलर था। इस प्रकार डॉलर के मूल्य में देश के निर्यात में 9.71 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निर्यात के ये आंकड़े सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए।

वहीं, रुपये के मूल्य में देश का निर्यात इस साल जून में 1,73,682.55 करोड़ रुपये रहा जोकि जून 2018 में 1,87,800.20 करोड़ रुपये था। इस प्रकार रुपये के मूल्य में देश के निर्यात में 7.52 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न व आभूषण वस्तुओं के निर्यात का मूल्य जून 2019 में 19.15 अरब डॉलर रहा जोकि पिछले साल के इसी महीने के निर्यात के मूल्य 20.13 अरब डॉलर से 4.86 फीसदी कम है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भारत के कुल निर्यात का मूल्य 81.08 अरब डॉलर (5,63,984.51 करोड़ रुपये) रहा जबकि पिछले साल की पहली तिमाही में देश का कुल निर्यात 82.47 अरब डॉलर (5,52,781.61 करोड़ रुपये) था।

इस प्रकार डॉलर के मूल्य में पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले 1.69 फीसदी की गिरावट रही जबकि रुपये के मूल्य में 2.03 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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