श्रीलंका में फंसे भारतीय स्वदेश लौटे

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कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए उड़ानें बंद हो जाने की वजह से श्रीलंका में फंस गए 700 से अधिक भारतीय अंतत: मंगलवार को स्वदेश लौट आए।

भारतीय नागरिकों को नौसेना के जहाज आईएनएस जलश्व के जरिए तूतीकोरिन लाया गया। इन्हें वंदे भारत मिशन के तहत समुद्र सेतु अभियान के हिस्से के रूप में लाया गया।

रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि जहाज ने श्रीलंका से सोमवार को प्रस्थान किया था और मंगलवार को तूतीकोरिन स्थित वी.ओ. चिदंबरम बंदरगाह पहुंच गया।

यात्रियों को जहाज से सुरक्षित उतार लिया गया और उन्होंने निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया। उन्हें बसों के जरिए टर्मिनल ले जाया गया।

टर्मिनल में यात्रियों को मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु एप डाउनलोट करने के लिए कहा गया और अन्य औपचारिकताएं भी पूरी की गईं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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