इस भारतीय युवक ने जीती नासा की चुनौती, दी कलाम साहब को श्रद्धांजलि

भारत के 18 वर्षीय युवक रिफत शारूक ने एक सैटलाइट बनाया है रिफत ने इसका नाम पूर्व भारतीय राष्ट्रपति और वैज्ञानिक अब्दुल कलाम के नाम पर कलामसैट रखा है

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जयपुर। हिंदोस्तां को यूंही नहीं विश्व गुरू कहा जाता है। भारतीय प्रतिभा ने अपनी विलक्षण मेधा क्षमता डंका हर दौर में बजाया है। फिर चाहे कोई भी देश हो, हिंदुस्तानी हर देश में भारत का नाम रौशन करते रहते हैं। इसी कड़ी में 18 वर्षीय रिफत शारूक का भी नाम जुड़ गया है। हाल ही में रिफत ने दुनिया का सबसे हल्का सैटलाइट बनाकर नासा की चुनौती जीत ली है। जी हां, अंतरिक्ष एजेंसी नासा और कोलोराडो स्पेस ग्रेंट कन्सॉर्शीअम कंपनी ने एजुकेशन कंपनी आईडूडल के साथ मिलकर क्यूब्स इन स्पेस प्रतियोगिता का आयोजन किया था।

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रिफत ने एक बहुत ही हल्के सैटलाइट को डिजाइन करके यह चुनौती जीत ली है। रिफत द्वारा बनाए गए इस नैनो उपग्रह का वजन महज 64 ग्राम ही है। इस दौरान रिफत ने इस सैटलाइट का नाम पूर्व भारतीय राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कलामसैट रखा है। रिफत की माने तो वह कलाम साहेब की तरह कुछ खास करना चाहता है।

आपको बता दे कि रिफत के बनाए इस सैटलाइट का मुख्य काम 3-डी प्रिंटेड कार्बन फ़ाइबर के प्रदर्शन को दिखाना है। नासा ने कहा है कि वह इस सैटलाइट को 4 घंटे लंबी उप-कक्षीय उड़ान पर भेजेगा। सैटलाइट के अंदरूनी हिस्से की बात करे तो यह एक ऑनबोर्ड कंप्यूटर की तरह की काम करेगा। इसमें विभिन्न बिंदुओं का मापन करने के लिए अलग अलग तरह के 8 सेंसर्स लगाए गए हैं।

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रिफत की बात करे तो वह तमिलनाडु के एक छोटे से शहर के मूल निवासी है। फिलहाल वह चेन्नई स्थित स्पेस किड्ज इंडिया में बतौर मुख्य वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। बता दे कि स्पेस किड्ज इंडिया भारतीय बच्चों और किशोरों के बीच विज्ञान व शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। कलामसैट से पहले भी रिफत ने केवल 15 साल की उम्र में हीलियम गैस से चलने वाला एक खास बैलून बनाया था।

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