भारतीय टीम की फिटनेस का बांग्लादेश पर काफी प्रभाव : तमीम

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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को अक्सर अपनी फिटनेस के प्रति अपने साथियों की सोच में बदलाव लाने का श्रेय दिया जाता है। हालांकि, बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल का मानना है कि कोहली के फिटनेस का प्रभाव भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। तमीम ने पूर्व भारतीय खिलाड़ी संजय मांजरेकर के साथ ईएसपीएनक्रिकइंफो के पॉडकास्ट में कहा, ” यह अवश्य कहना चाहिए। मैं इसलिए ऐसा नहीं कह रहा हूं क्योंकि मैं एक भारतीय क्रिकेटर से बात कर रहा हूं, जोकि एक पूर्व क्रिकेर हैं। मुझे लगता है कि भारत हमारा पड़ोसी देश है। ऐसे में हमारे खिलाड़ियों ने भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस से प्रभावित होकर खुद पर ध्यान देना शुरू किया है।”

31 वर्षीय तमीम ने साथ ही कहा कि जब उन्होंने कोहली को मैदान पर अभ्यास करते हुए देखा था तो खुद पर उनको शर्म आने लगी थी।

उन्होंने कहा, ” मुझे इसे बताने में कोई शर्म महसूस नहीं हो रही है कि मैंने जब दो-तीन साल पहले कोहली को जिम में और मैदान पर ट्रेनिंग करते देखा था तो मुझे खुद पर शर्म आने लगी थी कि मेरी उम्र का खिलाड़ी कितनी मुश्किल ट्रेनिंग कर रहा है।”

बांग्लादेशी बल्लेबाज ने कहा, ” विराट की सफलता का राज भी शायद उनकी फिटनेस है। वो जितनी ट्रेनिंग करते हैं मैं उसकी आधी भी नहीं करता। मैं अगर उनका 50 या 60 फीसदी भी कर लूं तो काफी बेहतर हो जाऊंगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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