भारतीय मूद्रास्फीति 4.62 प्रतिशत पर आ गई है।

0

जयपुर। भारत मे आर्थिक स्तिथी को स्पष्ट रुप से साफ साफ दिखाते हुए मुद्रास्फीति के आंकडे ये बात रहे हैं कि देश में जीवन स्तर सुधरने के बजाय, सामान्य जीवन स्तर बनाये रखना कठिन हो गया है।

आधिकारिक आंकडों के अनुसार खाद्य कीमतों में पर्याप्त वृद्धि सितंबर में भारत के अक्टूबर खुदरा मुद्रास्फीति को 3.62% से 4.62% पर ले गई। इसी तरह  वार्षिक  आधार पर, अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अधिक था जब खुदरा मुद्रास्फीति 3.38% थी।

आपको बता दें राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) सितंबर 2019 में 7.89% तक बढ़ गया जो समीक्षाधीन माह के दौरान पिछले वर्ष 5.11% था।  गौरतलब है कि डेटा ने संकेत दिया कि खुदरा मुद्रास्फीति के स्तर ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की 4% की मध्यम अवधि के लक्ष्य को तोड़ दिया है। लक्ष्य +/- 2% के एक बैंड के भीतर सेट किया गया है।

सब्जियों, दालों, अंडों, मांस और मछली की कीमतों ने वार्षिक आधार पर खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति को अधिक बढ़ा दिया। आंकड़ों के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में 26.10%, दालों और इसके उत्पादों में 11.72% और मांस और मछली में 9.75% की वृद्धि हुई। खाद्य और पेय पदार्थों की उप-श्रेणी में अक्टूबर 2018 में पिछले महीने 6.93% की वृद्धि दर्ज की गई। गैर-खाद्य श्रेणियों के बीच, ईंधन और प्रकाश खंड की मुद्रास्फीति समीक्षाधीन माह में 2.02% घट गई।

गौरतलब है कि इन आंकडों के सहारे पर एक और बात कही जा रही है कि भविष्य में इन सामान्य और आवश्यक चीजों के मूल्य में वृद्धी संभव है ऐसे में देश के हालात एक सामान्य व्यक्ति के हिसाब से कठिन होने वाले हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here