भारतीय शिक्षा नीति, विश्व के सबसे बड़े रिफॉर्म के रूप में उभरी : Nishank

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित एक वेबिनार आयोजित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ इस वेबिनार में शामिल हुए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपने विचार रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “वर्ष-2020 को जहां कोविड महामारी के लिए याद किया जाएगा तो वहीं दूसरी और चुनौतियों को अवसर में बदलने की हमारी जिजीविषा के लिए भी यह इतिहास में दर्ज होगा। एक ओर जहां पूरी दुनिया अपनी शैक्षिक व्यवस्था को एडजस्टमेंट और अमेंडमेंट के जरिए पैचवर्क की प्रक्रिया में व्यस्त थी, वहीं हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश को एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उपहार मिला है। ऐसी शिक्षा नीति जो नए भारत के निर्माण की आधारशिला साबित होगी। हमारी यह नीति विश्व के सबसे बड़े रिफॉर्म के रूप में भी उभरी है।”

निशंक ने कहा कि इस नीति के माध्यम से हम सब भारत को एक वैश्विक ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध भी हैं। शायद यही वजह है कि हमारी इस नीति की चर्चा एवं प्रशंसा कैंब्रिज विश्वविद्यालय से लेकर पूरा विश्व समुदाय कर रहा है।

उन्होनें कहा, “कैरेक्टर बिल्डिंग से लेकर नेशन बिल्डिंग तक भारतीय मूल्यों को समेटे हुए इस नीति में वोकेशनल स्टडीज, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च मैनेजमेंट, टैलेंट डेवलपमेंट जैसे हर उस पक्ष को उठाया गया है जो हमारी आगामी पीढ़ी, हमारे छात्रों को एक बेहतर मानव और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संपदा को तैयार करेगी। इस नई नीति के माध्यम से हम भारत को पुन विश्व गुरु की प्रतिष्ठा दिलाने एवं 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक लंबा छलांग लगाने हेतु पूर्णत तैयार हैं। ऐसे विराट लक्ष्य को पूरा करने का मार्ग आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का मानना है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को ग्लोबल इनोवेशन, उद्यमिता और स्टार्टअप के हब के रूप में उभरने की आवश्यकता है। साथ ही भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों को भी छात्रों के लिए रिसर्च और इनोवेशन का बेहतर माहौल बनाना होगा, ताकि छात्र कॉलेज विश्वविद्यालय से निकलने के बाद रोजगार के लिए किसी पर निर्भर न रहें, बल्कि दूसरों को नौकरी प्रदान करने में सक्षम बन सकें।

इस नीति के माध्यम से स्किल तथा वोकेशनल ट्रेनिंग के जरिए छात्रों को लगातार अपडेट और अपग्रेड करते रहने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें ‘जय अनुसंधान’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए एनआरएफ की स्थापना की जाएगी।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर बात करते हुए डॉ. निशंक ने कहा कि हमने इस दिशा में शिक्षक पर्व, विजिटर कॉन्क्लेव, गवर्नर कॉन्क्लेव, एजुकेशन कॉन्क्लेव जैसे तमाम कदम उठाए हैं। यह बेहद हर्ष की बात है कि नीति के कार्यान्वयन हेतु विभिन्न संस्थान, राज्य, केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने स्तर पर टास्क फोर्स का गठन कर रहे हैं तथा नीति को सफल बनाने के लिए प्रभावी कदम बढ़ा चुके हैं।

निशंक ने इस दौरान एएमयू के फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर मोहम्मद सज्जाद अतहर और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एस के सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक “द फिजिक्स ऑफ न्यूट्रिनो इंटरैक्शन” (कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस) का विमोचन भी किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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