इंडियन अवॉर्ड शोज में ओटीटी पर रिलीज हुईं फिल्मों को भी शामिल किया जाना चाहिए : Bhoomi

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अभिनेत्री भूमि पेडनेकर की दो फिल्में साल की शुरूआत में डिजिटली रिलीज हो चुकी हैं और अब उन्हें अपनी अगली फिल्म ‘दुर्गामती’ की रिलीज का इंतजार है। डिजिटल आजकल फिल्मों को दिखाए और रिलीज किए जाने के एक नए माध्यम के रूप में उभर रही है, ऐसे में भूमि का मानना है कि देश में आयोजित होने वाले विभिन्न पुरस्कार समारोहों में डिजिटली रिलीज होने वाली फिल्मों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

भूमि कहती हैं, “हमने जब ‘दुर्गामती’ पर काम शुरू किया था, उस वक्त हमारी चाह इसे सिनेमाघरों में रिलीज किए जाने के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करना था। हालांकि फिर महामारी की शुरूआत हो गई और अब एक इंडस्ट्री के रूप में हमने काम को एक नए सिरे से शुरू किया है। फिल्में अभी पहले डिजिटली रिलीज हो रही हैं, यह काफी अलग है, जिसके साथ हम अभी जी रहे हैं।”

वह आगे कहती हैं, “इस तरह के एक माहौल में हमारे देश के अवॉर्ड शोज द्वारा उन फिल्मों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जा रहा है। कलाकारों की उस कड़ी मेहनत को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिनसे वे इन फिल्मों को बना रहे हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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