यूएई में सीबीएसई टॉपरों में भारतीय ऑटिस्टिक किशोर भी शामिल

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारतीय स्कूल विद्यार्थियों में एक 17 वर्षीय ऑटिस्टिक छात्र ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के टॉपरों में जगह बनाई है। मीडिया ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।

शारजाह के दिल्ली प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले अमन मकबूल ने सोमवार को घोषित हुए परिणामों में 94.3 फीसद अंक प्राप्त किए हैं।

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उसने अपने स्कूल के पूरे करियर में हमेशा 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। उसने एक लेखक की मदद से परीक्षा लिखी।

मूल रूप से केरल के रहने वाले और यूएई में 20 वर्षों से रह रहे उसके पिता मकबूल अहमद ने कहा, “परीक्षा के बाद अमन ने हमें बताया कि वह 80 प्रतिशत और उससे ज्यादा अंक प्राप्त करेगा। हमें इतने अच्छे परिणामों की उम्मीद नहीं थी।”

उन्होंने कहा, “उसके पास एक फोटोग्राफिक मेमोरी है और वह लगातार उच्च अंक लाता रहा है। अमन ने कभी ट्यूशन या विशेष कोचिंग नहीं ली।”

दुबई स्थित इंडियन हाई स्कूल की भुवनेश्वरी जयशंकर टॉपर है जिसने फ्रेंच, गणित और सामाजिक विज्ञान में 100 अंकों के साथ 99.2 फीसद अंक हासिल किए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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