भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अभियानों में सैनिकों की सह-तैनाती का सुझाव दिया

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अभियानों के लिए विभिन्न देशों से शांतिदूतों की सह-तैनाती का सुझाव दिया है। भारत ने कहा कि यह कुछ राष्ट्रों द्वारा पैदा किए जा रहे अवरोध कि कैसे संयुक्त राष्ट्र के अभियानों में सैनिकों और सामग्रियों की तैनाती की जाएगी, से बाहर निकलने का तरीका है जिससे अभियानों में अडं़गा पैदा होता है।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि ‘विभिन्न देशों से शांतिदूतों की सह-तैनाती जैसे नवाचार विकल्प शांति के लिए साझेदारी की वास्तविक भावना को उभारते हैं और इसे आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है।’

उन्होंने कहा, “अगर हमें ऐसे अवरोध की संस्कृति से दूर जाना है जो हमें इस तरह के नवाचार की जरूरत है।”

हालांकि विभिन्न देशों के सैनिक समान अभियानों में काम करते हैं, उन्हें अधिकतर अलग इकाइयों में रखा जाता है और प्राय: उनके देशों द्वारा अड़चन पैदा किया जाता है कि कैसे इनका प्रयोग किया जाएगा।

इस वजह से कभी कभी कुछ शांतिदूतों को अन्य देशों की सामग्रियों के प्रयोग से रोक दिया जाता है या मौजूद कर्मियों को स्थिति की गंभीरता के बावजूद या अन्य शांतिदूतों पर खतरे के बावजूद तैनात नहीं किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के अभियानों के साथ समस्याओं का जिक्र करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा, “‘नो मेंस लैंड’ में पीसकीपिंग, मुश्किल माहौल में शांति बनाए रखने की कोशिश और शांति को बनाए रखने के लिए संरक्षण को लागू करने की कोशिश के बीच, जहां इसे बनाए रखने के लिए कोई मौजूद नहीं है।”

उन्होंने इसके अलावा सैनिकों का योगदान देने वाले देशों और सुरक्षा परिषद के बीच संपर्क के अभाव की भी आलोचना की।

हालांकि इस तरह के संपर्क की जरूरत 1994 से परिषद के अध्यक्ष के बयानों में परिलक्षित होते रहे हैं। इसके अलावा अन्य दस्तावेजों और रिपोर्ट में इसका वर्णन किया गया है।

इस संबंध में एक रिपोर्ट के अनुसार, “व्यवहार में हम, परिषद और कर्मियों को मुहैया कराने वाले देशों के बीच सहयोग के प्रभावी सुधार को नहीं देखते हैं।”

उन्होंने कहा, “यह इस संबंध में निजी सक्रियता से बाहर निकलकर समग्र कार्रवाई करने का वक्त है।”

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र नेतृत्व और कई सदस्य देशों ने ज्यादा महिला शांति दूतों को तैनात करने की महत्ता का मामला उठाया है। खासकर तब, जब मुश्किल में फंसी महिलाओं और बच्चों को बेहतर सुरक्षा देने की बात आती है तो यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है, लेकिन इसमें थोड़ी बहुत प्रगति हुई है।

अकबरुद्दीन ने मामला उठाते हुए कहा कि जुलाई में कुल 86,687 शांतिदूतों में से केवल 5,243 महिलाएं ही शांतिदूत थीं, यानी कुल शांतिदूतों में केवल 6 प्रतिशत ही महिलाएं हैं। 1993 में इसके गठन के बाद महिलाओं की संख्या में अबतक केवल 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गठन के समय इसमें केवल 1 प्रतिशत महिलाएं थीं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जुलाई में भारत के कुल 6,178 शांतिदूतों में केवल 81 महिलाएं ही शामिल थीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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