चीनी कंपनियों को वापस भेजने की तैयारी में भारत, 50 निवेश प्रस्तावों पर समीक्षा कर रही सरकार

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चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच भारत सरकार नए प्लान के तहत बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। रॉयटर्स के अनुसार, चीनी कंपनियों से जुड़े करीब 50 निवेश प्रस्तावों को लेकर सरकार समीक्षा कर रही है। अप्रैल में भारत सरकार ने नए नियमों का ऐलान किया था। इसके तहत पड़ोसी देशों में स्थित संस्थाओं द्वारा सभी निवेशों को केंद्र की मंजूरी की जरूरत है।

भारत के नए नियमों की चीनी निवेशकों ने कड़ी आलोचना की है। नए निवेश नियमों को लागू करने की वजह कोरोना संकट में अवसरवादी अधिग्रहण को रोकना है। रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प एक बड़ा कारण हो सकती है। बता दें कि 15 जून की रात को चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इस हिंसक घटना में चीन के भी 40 जवान मारे गए थे।

एक्सपर्ट की मानें तो कई तरह की मंजूरी की जरूरत है। इसके चलते हम थोड़ा सतर्क हो रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया है कि नियम बदलने के बाद चीनी निवेशकों ने फंडिग से जुड़े करीब 40-50 आवेदन फाइल किए हैं। इनकी केंद्र सरकार समीक्षा कर रही है।

पिछले महीने बॉर्डर पर हुई हिंसक झड़प के बाद देश में चीन को लेकर आक्रोश है। इसके चलते भारत सरकार ने चीन के 59 चीनी ऐप्स को बैन कर दिया है। भारत ने चीन पर डिजीटल स्ट्राइक की है। लेकिन मोदी सरकार को चीन को लेकर कई बड़े कदम उठाने की खासी जरूरत है।

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