चीन को पीछे छोड़ भारत की जनसंख्या हुई 150 करोड़ : गिरिराज सिंह

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जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर मेरठ से बीते 11 अक्टूबर को भाजपा नेताओं के नेतृत्व में निकली यात्रा का रविवार को जंतर-मंतर पर समापन हो गया। नानाजी देशमुख और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन पर शुरू हुई इस जनसंख्या समाधान यात्रा में मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल और कई भाजपा नेता शामिल हुए। यात्रा के आखिरी दिन जंतर मंतर पर आयोजित रैली में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि देश की जनसंख्या 150 करोड़ हो गई है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कहा, “वर्तमान समय में 125 करोड़ भारतीयों के पास आधार है, वहीं 20 प्रतिशत यानी 25 करोड़ नागरिक बिना आधार के हैं और लगभग पांच करोड़ बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए अवैध रूप से भारत में रहते हैं। इससे पता चलता है कि हमारे देश की जनसंख्या सवा सौ करोड़ नहीं, बल्कि 150 करोड़ है और हम चीन से आगे निकल चुके हैं।”

गिरिराज ने कहा, “हमारे पास कृषि योग्य भूमि दुनिया का करीब दो प्रतिशत है, पीने योग्य पानी चार प्रतिशत है और जनसंख्या दुनिया की 20 प्रतिशत है। यदि चीन से तुलना करें तो हमारा क्षेत्रफल चीन का लगभग एक-तिहाई है और जनसंख्या वृद्धि की दर चीन से तीन गुना है। चीन में प्रति मिनट 11 बच्चे और भारत में प्रति मिनट 33 बच्चे पैदा होते हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1974 से हम लोग हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मृदा प्रदूषण की समस्या कम नहीं हो रही है और इसका मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है।

आरएसएस पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने कहा, “जल जंगल और जमीन की समस्या, रोटी कपड़ा, मकान और पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है। डकैती, झपटमारी, घरेलू हिंसा और महिलाओं पर शारीरिक मानसिक अत्याचार, अलगाववाद कट्टरवाद और पत्थरबाजी का मूल कारण भी जनसंख्या विस्फोट है।”

जनसंख्या समाधान यात्रा के संयोजक व सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसद-विधायक तथा बुद्धिजीवी इस बात से सहमत हैं कि देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा समस्याओं का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है।

उन्होंने कहा कि “जब तक दो करोड़ बेघरों को घर दिया जाएगा तब तक 10 करोड़ बेघर और पैदा हो जाएगे, इसलिए एक नया जनसंख्या कानून ड्राफ्ट करने में समय खराब करने के बजाए चीन के जनसंख्या नियंत्रण कानून में ही आवश्यक संशोधन कर उसे लोकसभा में पेश करना चाहिए। कानून मजबूत और प्रभावी होना चाहिए और जो व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करे, उसका राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता, बिजली कनेक्शन और मोबाइल कनेक्शन बंद करना चाहिए।”

उपाध्याय ने कहा, “कानून तोड़ने वालों पर सरकारी नौकरी और चुनाव लड़ने तथा पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध लगाना चाहिए। ऐसे लोगों को सरकारी स्कूल, हॉस्पिटल सहित अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित करना चाहिए और 10 साल के लिए जेल भेजना चाहिए।”

जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा, “हजारों साल पहले भगवान राम ने जनता को संदेश देने के लिए लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न सहित स्वयं ‘हम दो-हमारे दो’ नियम का पालन किया था, जबकि उस समय जनसंख्या समस्या इतनी खतरनाक नहीं थी।”

जनसंख्या समाधान फाउंडेशन की संयोजक ममता सहगल ने कहा कि “संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्देशानुसार हम लोग प्रत्येक वर्ष 25 नवंबर को महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाते हैं, लेकिन महिलाओं पर हिंसा बढ़ती जा रही है और इसका मूल कारण भी जनसंख्या विस्फोट है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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