समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं मानने वाले 25 देशों में शामिल हुआ भारत, निरस्त हुआ धारा 377 का विशेष भाग

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जयपुर,  भारत अब उन देशों की श्रेणी में जुड़ गया है जहां समलैंगिक संबंधों को अपराधन नहीं मानते है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। अब भारत में एलजीबीटी समुदाय के संबंध वैध माने जाएंगे। हालांकि अभी भी दुनियां मे 45 ऐसे देश है जहां पर इस काम अपराध माना जाता है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आईपीसी की धारा 377 के तहत आने वाले काम को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और कहा कि यह समता के अधिकारो का उल्लघंन करता है।Image result for सुप्रीम कोर्ट ने किया 377 के विशेष भाग को निरस्त

इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांस एंड इंटरसेक्स एसोसिएशन कि रिपोर्ट के अनुसार आज भी दुनिया में आठ ऐसे देश हैं जहां समलैंगिक संबंध बनाने पर मौत की सजा दी जाती है। बता दें कि जिन देशों समलैंगिक संबंधों वैध बताए है उनमें अर्जेंटीना, ग्रीनलैंड, आईसलैंड, स्पेन, बेल्जियम, आयरलैंड, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, लक्जमबर्ग, स्वीडन और कनाडा शामिल हैं।Related image

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र के भारत स्थित कार्यालय ने तारीफ करते हुए कहा है कि भारतीय दंड सहिंता की धारा 377 के विशेष हिस्से को निरस्त करने से एलजीबीटीआई के लोगों के साथ भेदभाव करने के मामाले कम हो जाएंगे। साथ ही इन लोगों को भी खुलकर जीने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि फैसले के बाद इन लोगों को अलग नजरों से नहीं देखा जाएगा।Related image

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में यौन रुझान और लैंगिक अभिव्यक्ति किसी भी व्यक्ति की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं, तथा इन तत्वों के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना मानवाधिकारों का ‘घोर’ उल्लंघन है। साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एलजीबीटीआई समुदाय के लोगों की हितों की रक्षा हेतु काम करेगा। जिससे इन लोगों के प्रति भेदभाव की स्थिति कम होंगी।

 

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