वैज्ञानिक नवाचार के लिए हब के रूप में उभर रहा भारत : Jitendra Singh

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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत तेजी से वैज्ञानिक विकास में अग्रणी देश बन रहा है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले कुछ वर्षो में, सरकार ने स्वदेशी वैज्ञानिक नवाचार को प्रात्साहित करने के लिए कुछ क्रांतिकारी और व्यावहारिक निर्णय लिए हैं जो आत्मानिर्भर भारत की कुंजी होगी।”

सिंह ने आजादी के बाद पहली बार निजी खिलाड़ियों के लिए भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को अनलॉक करने के निर्णय का विशेष उल्लेख किया।

सिंह ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि इसरो ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर पीएसएलवी सी 51/अमेजोनिया-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर एक और मील का पत्थर हासिल किया है।

जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार धर ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा की गई हालिया शोध गतिविधियों पर एक रिपोर्ट पेश की।

न्यूज स़ोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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