भारत का वर्णन एक रंग में नहीं हो सकता : महेश भट्ट

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इस बात का जिक्र करते हुए कि भारत के वर्णन को एक रंग में घटाया नहीं जा सकता है, फिल्मकार महेश भट्ट ने शनिवार को कहा कि विविधता से भरपूर इस देश की बहुलता का जश्न मनाया जाना चाहिए। यहां 24वें कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में भट्ट ने कहा, “हम भारत का वर्णन एक रंग में नहीं कर सकते। यह एक विविधता से भरपूर देश है और हमें इसकी बहुलता का जश्न मनाने की जरूरत है।”

भट्ट ने कहा, “आज की बदलती दुनिया और बदलते वक्त में मेरा मानना है कि फिल्ममेकर और कहानीकार ही दुनिया को एकजुट रख सकते हैं। यह महसूस करने का अवसर है कि हममें से कोई एक हम सभी की तुलना में बहुत कम है।”

भट्ट ने चीनी रहस्यमयी पक्ष के बारे में बातें की, जिसकी एक आंख और एक पंख है, और यह तब तक अधूरा रहता है, जब तक कि वह अपने दूसरे हिस्से से नहीं मिलता। जब उसके दोनों हिस्से साथ मिलते हैं, तभी वह उड़ पाता है और देख पाता है।

उन्होंने कहा, “यह हिन्दी सिनेमा में हमारे साथ हुआ था। जब बंगाल हमारे पास अपनी बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता के साथ आया, तो मुंबई की फिल्मी दुनिया उत्कर्ष पर पहुंची। इस धारा को और अधिक गहन होना चाहिए, ताकि एक राष्ट्र के रूप में हम सभी रंग को शामिल कर सकें।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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