‘भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक 300 अरब डॉलर हो जाएगा’

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क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसेप) से भारत के अलग होने के बाद देश का आसियान के साथ मौजूदा आदान-प्रदान वापस फोकस में आ गया है और उद्योग के एक अध्ययन ने कहा कि भारत का आसियन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक मौजूदा के 142 अरब डॉलर (2018) से बढ़कर 300 अरब डॉलर हो जाएगा। पीएचडी रिसर्च ब्यूरो, पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा कराए गए अध्ययन में कहा गया है कि आसियान देशों को भारत की निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की मात्रा 20 कमोडिटी में बहुत अधिक है, जो इन देशों के लिए भारत के निर्यात बास्केट को और विस्तारित करने का मौका प्रस्तुत करता है।

अध्ययन के अनुसार, 2018-19 में आसियान को भारत का मर्चेडाइज निर्यात लगभग 38 अरब डॉलर, आयात 59 अरब डॉलर और कुल व्यापार 97 अरब डॉलर है।

सेवा क्षेत्र में भारत का आसियान देशों को निर्यात 24 अरब डॉलर, आयात 21 अरब डॉलर और कुल व्यापार 45 अरब डॉलर है।

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष, डॉ. डी.के. अग्रवाल ने कहा, “विनिर्माण और सेवा व्यापार में तालमेल तलाशने, भारत-आसियन के बीच पेशेवरों का आवागमन और व्यापारिक दौरा सुनिश्चित करने, सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने जैसे कदमों से भारत और आसियान की अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग मजबूत होगा।”

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आसियान की अर्थव्यवस्थाओं में भारत का निर्यात बढ़ाने की अपार संभावना है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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