भारत – अमेरिका के बीच ‘कॉमकासा’ करार, क्या फर्क पड़ेगा चीन व पाकिस्तान पर, जानिए ?

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जयपुर, अमेरिका व भारत के बीच हुई 2+2  वार्ता में एक नई रक्षा संधि कॉमकासा पर हस्ताक्षर किए गए। जिससे दोनें देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंध स्थापित होंगे। विषेशज्ञों का कहना है कि इस समझौते के बाद भारत अमेरिका के लिए एक नाटो देश की तरह हो गया है। इससे पहले अमेरिका ने जापान व आस्ट्रेलिया के साथ भी इस तरह का समझौता किया है। बता दें कि अब से पहले अमेरिका भारत के साथ रक्षा सौदों में बहुत ही कम सहयोग करता था।Image result for टू प्लस टू वार्ता

लेकिन अब इस समझौते के बाद हर वर्ष करी 10 अरब डॉलर के हथियार खरीदे जा सकेंगे। इसके बाद से भारत की रक्षा मजबूती और बढ़ जाएगी। दोनों देशों के बीच हुई वार्ता को सफल बताया जा रहा है। वार्ता में दोनों देशों के बीच हॉट लाइन सेवा को स्थापित करने पर मंजूरी बनी। साथ ही भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका रक्षा मंत्रालय में एक अधिकारी की नियुक्ति की जाएंगी। जो भारत के रक्षा आपूर्ती मामलों की जानकारी रखेगा।Image result for टू प्लस टू वार्ता

जानिए क्या है कॉमकासा – कॉमकासा मतलब कम्युनिकेशंस एंड इंर्फोमेशन ऑन सिक्यूरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट है जो अमेरिका ने नाटो देशों के साथ किया है। इस करार के बाद नाटो देशों की बराबर दर्जा दिया जाता है। अमेरिका यह करार अपने सहयोगी देशों को बेहद अत्याधुनिक रक्षा तकनीक देने और आपातकालीन स्थिति में उन्हें तत्काल मदद देने की प्रतिबद्धता साबित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका व भारत के बीच इस समझौते से चीन नाराज हो सकता है।Image result for टू प्लस टू वार्ता

क्योंकि अमेरिका ने कहा है कि दोनों देशों की तीनों सेनाए अगले साल हिंद महासागर में सेन्य अभ्यास करेगीं, बता दें की भारत हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर परेशान था। पाकिस्तान को इस करार से यह चिंता सता रही है कि अब अमेरिका भारत को गोपनीय सुरक्षा तकनीक उपलब्ध करवाएगा। जिससे भारतीय सेना को अत्याधुनिक संचार प्रणाली के साथ साथ एडवांस हथियार भी मिलेंगे। साथ ही भारत की ओर से स्थानीय विमानों को तैयार करने में अमेरिका की मदद ली जा सकती है।

 

 

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