इंडिया-ए ने वेस्टइंडीज-ए को 4-1 से हराया

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रितुराज गायकवाड, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर के शानदार अर्धशतकों की मदद से इंडिया-ए ने रविवार को खेले गए पांचवें और अंतिम अनाधिकारिक वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज-ए को हराते हुए पांच मैचों की सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। भारतीय टीम ने कूलिज क्रिकेट मैदान पर खेले गए इस मैच के दौरान 237 रनों के लक्ष्य को 33 ओवर में हासिल कर लिया। वेस्टइंडीज-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 47.4 ओवरों में 236 रन बनाए थे।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी वेस्टइंडीज के लिए सुनील अम्बरीस ने 61 रन बनाए जबकि शेरफाने रदरफोर्ड ने 65 रनों की पारी खेली।

इंडिया-ए की ओर से नवदीप सैनी और दीपक चाहर तथा राहुल चाहर ने दो-दो विकेट लिए। ये तीनों वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किए गए हैं।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए गिल ने 40 गेंदों पर 69 रन बनाए जबकि रितुराज ने 99 रनों की पारी खेली। अय्यर ने 61 रनों की बेमिसाल पारी खेली।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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