किसानों के लिए केंद्र सरकार के द्वारा MSP में की गई बढ़ोतरी एक धोखा है?

उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा किसान हैं और राजनीतिक रूप से ये राज्य किसी भी पार्टी के लिए सबसे बड़ा माना जाता है।

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जयपुर। इसी महीने भाजपा की केंद्र सरकार ने किसानों के लिए चुनावी घोषणा करते हुए एमएसपी यानि कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफा कर दिया था। किसानों के लिए किये गए इस फैसले पर जहां केंद्र सरकार खुद की पीठ थपथपा रही है, वहीं विपक्ष इसे बस एक झांसा बता रहा है।

सरकार ने खरीफ फसलों में आने वाली सबसे बड़ी फसल यानि कि धान की MSP को बढ़ा दिया है। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल का इज़ाफा किया है। सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इस फैसले का प्रस्ताव खुद कृषि मंत्रालय ने दिया था।

लेकिन उत्तर प्रदेश के किसान सभा के नेता इस फैसले को धोखा बता रहे हैं। प्रदेश के किसान सभा का कहना है कि योगी और मोदी सरकार दोनों ने किसानों को धोखा दिया है। सभा के अनुसार योगी सरकार ने बीच में ही खरीद बंद करा दी थी, जिससे कि 70 प्रतिशत से ज़्यादा किसान वंचित हो गए थे। इस वजह से किसानों को बाज़ार में गेहूं को 250-300 प्रति क्विंटल बेचना पड़ रहा है।

किसान सभा का आरोप है कि स्वामीनाथन आयोग के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2340 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिये, जबकि सरकार ने 1750 रुपये प्रति क्विंटल की घोषणा की है। इसके साथ ही किसान सभा का आरोप है कि सरकार ने बाजरे में 844 रूपये, प्रति क्विंटल और मकके में 520 रुपये प्रति क्विंटल कम एमएसपी की घोषणा की है।

किसान सभा ने साथ ही ये भी कहा है कि खरीफ फसलों मे सिर्फ गेहूं और धान की फसलों के एमएसपी का इज़ाफा किया गया है। सभा ने केरल के वामपंथी सरकार का भी उदाहरण दिया है जहां पर सरकार किसानों को धान की कीमत 2350 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा किसान हैं और राजनीतिक रूप से ये राज्य किसी भी पार्टी के लिए सबसे बड़ा माना जाता है।

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