आयकर विभाग ने किया करोड़ों रुपयो के टीडीएस घोटाले का पर्दाफाश

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देश में पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटालों के बाद आयकर विभाग और सीबीआई की नज़र बाकी क्षेत्रों पर पड़ गई है। एक के बाद एक उद्योगपतियों और कंपनियों की जांच पड़ताल शुरु हो चुकी है। ऐसे में जब कई जांच एजेंसियों के दायरे में लोग आ रहे हैं, तो इनकम टैक्स विभाग की नज़र पड़ी है अब टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स यानि कि टीडीएस पर।

इनकम टैक्स ने अब कंपनियों के द्वारा टीडीएस में घोटाले का पर्दाफाश किया है। आईटी विभाग ने देश की 447 कंपनियों का पता लगाया है जिन्होंने अपने कर्मचारियों के वेतन से टीडीएस काट तो लिया है पर उस टीडीएस को सरकार के पास जमा नहीं किया है। 477 कंपनियों के टीडीएस को मिलाकर कुल रकम 3200 करोड़ रुपयों की होती है।

क्या है टीडीएस?

टैक्स डीडक्शन ऐट सोर्स यानि कि टीडीएस टैक्स काटने का वो माध्यम है जो कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को दिये जाने वाले वेतन से टैक्स के रुप में काट लेती है। ये टैक्स कर्मचारियों के वेतन के हिसाब से सरकार के नियमों के हिसाब से काटा जाता है। इन कंपनियों को बाद में ये टीडीएस आईटी विभाग के पास जमा करने होते हैं।

 

क्या है मामला?

इनकम टैक्स के एक अधिकारी के अनुसार हाल ही में किये गए वेरीफिकेशन सर्वे के हिसाब से 447 कंपनियों के ऐसे मामले आए जिन्होंने कर्मचारियों से टीडीएस काट तो लिया पर उसे इनकम टैक्स में जमा नहीं करवा पाए। इस टीडीएस का कुल मूल्य करीब 3200 करोड़ रुपये के आस पास है। ये आंकड़ा अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक का है। आरोप ये भी है कि कंपनियों ने इस रकम को वापस से खुद पर ही खर्च कर दिया है। कुछ कंपनियों ने इस मामले में माफी भी मांगी है और टैक्स जमा करने की मोहलत मांगी है।

क्या हो सकती है कार्रवाई?

आईटी विभाग ने इस मामले में केस दर्ज करने का फैसला कर लिया है। इस मामले को विभाग की टीडीएस शाखा देख रही है। आरोप साबित होने पर आरोपियों को 3 महीने से लकर 7 साल की सज़ा जुर्माने के साथ हो सकती है। आरोपियों पर आईटी एक्ट के सेक्शन 276बी के तहत कार्रवाई की जाएगी। कहा जा रहा है कि कंपनी के मालिक और अधिकारियों पर इस बात का भी केस किया जाएगा कि उन्होंने अपने कर्मचारियों के साथ धोखा-धड़ी की है।

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