इस गाँव में धुप में जाने पर जल जाते है लोग ,जानिए इसके बारे में पूरी जानकारी

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क्या आपने कभी सुना है कि कोई लोग धूप में जाते ही जल गया हो नहीं ना, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारेे में बताएंगे जहां पर लोग जैसे ही धूप में निकलते हैं तो वो लोग जले जाते हैं । आज हम बात कर रहे हैं, ब्राज़ील में साओ पाउलो के पास में स्थित अरारस गाँव के बारे में जहां पर लोग धुप से एलर्जी है वो लोग जैसे ही धुप में निकलते है उनकी स्किन जल जाती है । जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि, यहां के लोग एक बहुत ही अजीबो गरीब बीमारी से ग्रसित है जिसका नाम है एक्सोडेरमा पिगमेंटोसम है ।

अब आपको बता दें कि, यह एक दुर्लभ बीमारी है। जिसके कारण धुप में निकलने से व्यक्ति की त्वचा गलने लग जाती है । वैसे तो यह बीमारी लाखों लोगों में से किसी एक को होती है पर इस गांव में करीब 800 लोगों में से 600 लोग पीडित है । इस बीमारी के बढ़ने से केंसर का खतरा भी होता है । बता दें कि यहां के ज्यादातर लोग खेती से जुड़े हैं, जिसके कारण धूप से बचना मुश्किल होता है ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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