शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें इस दिशा में अपना मुंह, जानें पूजा के लिए कौन सी दिशा है सही

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जयपुर। सावन में सभी लोग शिव पूजा करते हैं लेकिन कई लोग शिवलिंग की पूजा के नियम और विधि के बारे मे जाने बगैर ही पूजा करते हैं। ऐसे में पूजा का शुभ फल नहीं मिलता बल्कि ऐसा करने पर दोष के भागी बनते है। शिव पुराण में शिवलिंग की पूजा के लिए कुछ बाते बताई गई हैं जिनको अपनाने से पूजा का शुभ फल मिलता है। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग के आस पास  अलग-अलग दिशाओं में अन्य देवी-देवताओं का स्थान होता है। ऐसे मे शिवलिंग की पूजा के संबंध में इन बातों को जानना आवश्यक है।

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  • कुछ लोग शिवलिंग की पूजा पीछे से करते हैं ऐसा करना गलत है। शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाने समय और पूजा करते समय सही दिशा में बैठना के साथ ही भस्म का त्रिपुण्ड लगाने का भी नियम बताया है। इसके साथ रुद्राक्ष की माला भी पहननी चाहिए। भस्म न हो तो मिट्टी से भी मस्तक पर त्रिपुंड लगाने के बारे में कहा गया है।

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  • शिवलिंग की पूजा के समय मुह को पूर्व दिशा की ओर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह दिशा में भगवान शिव के आगे या सामने होती है और धार्मिक आधार पर देव मूर्ति के ठीक सामने न तो खड़े होते है और न ही बैठते हैं।
  • पूजा के करते समय उत्तर दिशा में नहीं खड़ा होना चाहिए क्योंकि उत्तर दिशा में भगवान शिव के साथ देवी पार्वती विराजती है।

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  • पूजा के दौरान पश्चिम दिशा में नहीं बैठना इस दिशा को भगवान शंकर की पीठ माना जाता है। इसलिए पीछे से पूजा करने का शुभ फल नहीं मिलता।
  • पूजा करते समय दक्षिण दिशा में बैठना चाहिए इस दिशा में बैठने से मुह उत्तर दिशा की ओर होता है। इस दिशा को शिवलिंग की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल मिलता है। मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं।

 

 

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