Assistant Professor की नियुक्ति में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ किए गए

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दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्व स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के विभिन्न विभागों में हाल ही में हुए इंटरव्यू में तदर्थ सहायक प्रोफेसर के पदों पर एससी,एसटी,ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों को नॉट फाउंड किए जाने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है। शिक्षकों ने इसकी जांच उच्चाधिकारियों से कराने की मांग की है। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में गुरुवार को इस मुद्दे पर एक विशेष याचिका दाखिल की है। अपनी इस याचिका में बताया गया है कि स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज ने विभिन्न विभागों में तदर्थ सहायक प्रोफेसरों के पदों पर साक्षात्कार लिए थे, लेकिन साक्षात्कार के बाद कुछ विभागों में एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के उम्मीदवारों को नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया गया है।

डीटीए के मुताबिक इन श्रेणियों में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध थे ,उन्हें जानबूझकर सिस्टम में आने से रोका गया। जिन विभागों में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया है उनमें 02 पद ओबीसी ( रसायन विज्ञान व राजनीति विज्ञान विभाग ) 02 एससी पद ( रसायन विज्ञान व भौतिकी विभाग ) 01 एसटी पद ( वाणिज्य विभाग ) है। इसके अलावा कम्प्यूटर साइंस से ओबीसी पद खत्म कर दिया गया व ज्योलॉजी में एक ओबीसी पद पर इंटरव्यू नहीं किया।

डीटीए के प्रभारी डॉ हंसराज सुमन ने कहा कि, “इंटरव्यू में शामिल सभी विभागों में योग्य उम्मीदवार उपस्थित हुए थे, लेकिन चयन बोर्ड के सदस्यों के प्रयासों के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने आरक्षित श्रेणी के पदों को नॉट फाउंड सूटेबल कर दिया गया। आरक्षण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए संसदीय समिति ने पिछड़ा वर्ग आयोग, एससी- एसटी आयोग, यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय व डीओपीटी के अधिकारियों को बुलाया था।

इस बैठक में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में आरक्षित सीटों पर एनएफएस नहीं करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद 22 दिसम्बर 2020 राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी एनएफएस पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने डीयू के विभागों में सहायक प्रोफेसर की स्थायी नियुक्तियों में एनएफएस नहीं करने के लिए अपना प्रयास किया। आयोग के निदेशरें के बावजूद अब स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज ने कई एडहॉक पदों पर साक्षात्कारों में एनएफएस किया है।

एससी, एसटी आयोग राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में दायर याचिका में लिखा गया है कि जिन विभागों में स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज ने आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया है, उनकी जांच कराने के लिए एक कमेटी गठित करें। इस कमेटी में कॉलेज से बाहर के सदस्यों के अलावा डीओपीटी, यूजीसी, डीयू लायजन ऑफिसर को रखा जाए। साथ ही कमेटी यह भी जांच करें कि इन पदों पर कितने उम्मीदवार एडहॉक टीचर्स के साक्षात्कार के समय उपस्थित हुए, कितने अनुपस्थित ,चयन समिति की मिनट्स में किस आधार पर इन उम्मीदवारों को नॉट फाउंड सूटेबल किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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