गुजरात में प्रवासी बिहारी मजदूरों पर हमलों पर रोक लगे : बीरबल झा

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गुजरात के साबरकांठा जिले में बीते 28 सितम्बर को चौदह माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद वहां प्रवासी मजदूरों पर हुए हमले के विरोध में शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी के लक्ष्मीनगर में बिहार के सैकड़ों लोग एकत्र हुए। प्रवासी बिहारियों को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बीरबल झा ने कहा कि गुजरात में हुई दुष्कर्म की घटना काफी निंदनीय है, लेकिन घटना के बाद असामाजिक तत्वों द्वारा बेगुनाह प्रवासियों किए जा हमले भी दुखद हैं।

उन्होंने कहा, समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाए जाने से गुजरात से प्रवासी मजदूरों को पलायन होने लगा है। लिहाजा, इन हमलों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

बिहारवासियों ने कहा कि प्रदेश सरकार को असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटना चाहिए, ताकि प्रवासी मजदूरों का पलायन न हो।

डॉ. झा ने कहा, “गुजरात औद्योगिकी दृष्टि से उन्नत है और वहां रोजगार के काफी अवसर हैं। यही कारण है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग काम की तलाश में वहां जाते हैं। औद्योगिक नगर अहमदाबाद समेत गुजरात के कई जिलों में बिहार और उत्तर प्रदेश के असंख्य लोग निवास करते हैं। उनकी सुरक्षा जरूरी है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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