कांग्रेस ‘अकलियतपरस्ती’ से उबरने की कोशिश में

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कांग्रेस अपने ऊपर लगी ‘अकलियतपरस्ती’ (अल्पसंख्यकों की पक्षधर) की तोहमत से बेचैन है। पार्टी को लगने लगा है कि अब यह बताने का वक्त आ गया है कि इस तोहमत को धोया जाए। यही कारण है कि कांग्रेस को बार-बार सफाई देनी पड़ रही है। वह लगातार कह रही है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उसे अकलियतपरस्त बताने के लिए लगातार दुष्प्रचार कर रही है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कई मंदिरों में दर्शन के बाद, मानसरोवर की यात्रा पर निकल पड़े हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार द्वारा स्थापित किए गए 50 से ज्यादा मंदिरों का ब्यौरा दिए जा रहे हैं। कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ को यह बताना पड़ रहा है कि उन्होंने छिंदवाड़ा में देश का सबसे बड़ा हनुमान मंदिर बनवाया है।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पहचान सबसे बड़े अल्पसंख्यक समर्थक नेता के तौर पर बन चुकी है। यही कारण है कि उन्हें नर्मदा नदी की परिक्रमा यात्रा करनी पड़ी। इतना ही नहीं, वे लगातार यही बता रहे हैं कि उन जैसे कर्मकांडी कम ही हैं।

सवरेदयी चिंतक संतोष द्विवेदी कहते हैं कि कांग्रेस वर्तमान समय में पहचान के संकट के दौर से गुजर रही है, इसके लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है। एक ऐसी पार्टी जिसके साथ ऐतिहासिक विरासत है, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसा नेता हुआ, कांग्रेस उस विरासत को नई पीढ़ी तक नहीं पहुंचा पा रही है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी विचारधारा और अपने कार्यो से अवगत कराने में विफल रहने की वजह से अब कांग्रेस को यह सब करना पड़ रहा है। वह अब बताने में जुटी है कि वह क्या है।

मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में आदिवासियों के बीच पहुंचे सिंधिया ने गुरुवार और शुक्रवार को अपनी जनसभाओं में भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “भाजपा राम मंदिर के निर्माण की बात करती है, मगर उसने राम का मंदिर तो नहीं बनाया, मगर बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर जरूर बनवा दिया।”

सिंघिया राजघराने ने 50 से ज्यादा मंदिर बनवाए हैं, मगर उसे प्रचारित कभी नहीं किया।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक साजी थॉमस का कहना है कि कांग्रेस को भाजपा ने राजनीतिक रणनीति के तहत अल्पसंख्यक-परस्त प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह बात सही है कि कांग्रेस पर यह आरोप चस्पा भी हो चुका है। यही कारण है कि दिल्ली से लेकर गांव-गांव तक कांग्रेस को अपनी सफाई देनी पड़ रही है और नेता अपने को धार्मिक बताने के लिए कई तरह के बयान दे रहे हैं।

मध्यप्रदेश में अगले तीन माह के भीतर विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इस चुनाव में किसी भी दल के पक्ष और विरोध में माहौल नहीं है, यही कारण है कि भाजपा अपने तरीके से मतदाताओं को लुभाने के साथ कांग्रेस की कारगुजारियों पर हमले बोल रही है।

वहीं, कांग्रेस लगातार भाजपा पर समाज में विष घोलने का आरोप लगाने के साथ उसकी नीतियों की आलोचना कर रही है और अपने को यह बताने में लगी है कि वह किसी एक वर्ग की परस्त नहीं है। मतदाताओं पर किसके दावों का कितना असर होगा, यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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