भारतीय सेना का अमर सैनिक,भूत बनकर दे रहा है सरहद पर ड्यूटी, मिल रही हैं छुट्टियां और प्रमोशन

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जयपुर, देश में कई सारे मंदिर है जहां पर देवताओं की पूजा होती है। लेकिन दोस्तो हमारे देश में एक ऐसा मंदिर है जहां एक सैनिक की मृत आत्मा की भी पूजा की जाती है। इतना ही नहीं यह आत्मा आज भी देश की सेवा करती है। यकीन नहीं होता है ना, लेकिन यह सच है और इस मंदिर का नाम है “बाबा हरभजन सिंह मंदिर” । इस मंदिर की कहानी सेना के एक जवान से जुडी हुई है। जो आज भी देश की सेवा कर रहे है।Image result for बाबा हरभजन सिंह का मंदिर
कहा जाता है कि यह आज भी सेना के जवानों को दिखाई देते है। अगर कोई बात या संदेश देना हो तो जवानों के सपने में आकर कहते है। सेना पर तैनात जवानों ने इस बात की पुष्टी भी की है। दरअसल यह आत्मा पंजाब रेजिमेंट के हरभजन सिंह की है। जो पिछले 45 सालों से देश की सेवा कर रही है। इतना ही नहीं जब सेना की कोई मिटिंग होती है तो इस आत्मा की कुर्सी भी लगाई जाती है।Image result for बाबा हरभजन सिंह का मंदिर
यहां है मंदिर –बाबा हरभजन सिंह का यह मंदिर गंगटोक के जेलेप्ला दर्रे पर 13000 फ़ीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जहां सैनिक की एक फोटो व उसका सामान रखा हुआ है। अब आपको बताते है कौन है हरभजन सिंह, इनका जन्म 30 अगस्त 1947 को गुजरावाला जो वर्तमान में पाकिस्तान में है, हुआ था । यह 24 वीं पंजाब रेजिमेंट के जवान थे।जो 1968 में एक दुर्घटना में शहीद हो गए थे। कहा जाता है कि दुर्घटना के बाद उनका शव नहीं मिला था लेकिन उन्होने जवानों के सपने में आकर बताया कि शव कहा पड़ा है उसके बाद जवानों की आस्था इनके साथ जुड़ गई।और उन्होंने मंदिर बना दिया।Image result for बाबा हरभजन सिंह का मंदिर

अभी भी देते है ड्यूटी –हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से ही देश के लिए ड्यूटी देते आ रहे है। इसके लिए उन्हें बाकायदा तनख्वाह भी दी जाती रही है और प्रमोशन भी किया जाता रहा है।इतना ही नहीं उन्हें छुट्टी भी दी जाती है। बाबा की छुट्टी के दौरान पूरा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था क्योकि उस वक्त सैनिकों को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी। लेकिन धीरे धीरे बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था, जिसमे की बड़ी संख्या में जनता इकठ्ठी होने लगी थी। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर बाबा को रिटायर्ड कर दिया गया। हालांकि आज भी बाबा के मंदिर में साफ सफाई की जाती है।और साथ ही रोजाना उनके लिए चादर बिछाई जाती है। जिस पर सुबह सीलवटे दिखाई देती है।

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