अवैध खनन मामला : हमीरपुर के डीएम ने बांदा के डीएम को दिखाया आईना!

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उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के बांदा जिले के किसान और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भले ही अवैध बालू खनन रोकने की मांग पर जल सत्याग्रह से लेकर सड़क जाम करने तक का आंदोलन किया हो, लेकिन बांदा जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका।

अलबत्ता, हमीरपुर के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने फौरी कार्रवाई कर बांदा जिलाधिकारी को कर्तव्यनिष्ठा का ‘आईना’ जरूर दिखाया है।

मामला बांदा जिले में संचालित छोटी-बड़ी 39 वैध बालू खदानों की आड़ में अवैध बालू खनन का है, जहां केन, यमुना, बागै और रंज जैसी नदियों से बालू कारोबार से जुड़े माफिया बेधड़क खनन कर रहे हैं। प्रशासन सब कुछ स्वीकार करने के बाद भी कार्रवाई करने से कतरा रहा है।

सचिवालय सूत्रों के मुताबिक, बांदा जिले में अवैध खनन रोकने के लिए जिलाधिकारी को ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा भी नहीं कि बांदा प्रशासन ने कुछ किया न हो। दिखावटी ही सही, अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) ने 31 अक्टूबर की शाम पूरे सरकारी अमले के साथ मुख्यालय से सटी दुरेंड़ी बालू खदान में छापेमारी की थी, लेकिन जलधारा से बालू निकालते पकड़ी गई कई पोकलैंड और एलएनटी मशीनों पर खनिज अधिकारी ने यह कह कर कार्रवाई नहीं होने दी कि ‘खदान आवंटी को मशीनों के इस्तेमाल की अनुमति प्राप्त है।

यहां के प्रशासन को नियम तब याद आए, जब तीन नवंबर को हमीरपुर के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने अपने यहां की सेंटर बालू खदान में छापामार कर जलधारा से बालू खनन करने पर आधा दर्जन से ज्यादा मशीनें बरामद कर 27 माफियाओं को गिरफ्तार करते हुए खदान सीज कर दी।

बांदा जिले में खनन का आलम यह है कि एक नवंबर को करीब तीन सौ किसानों अवैध खनन के खिलाफ केन नदी की जलधारा में ही 24 घंटे का जल सत्याग्रह करने के बाद दूसरे दिन दरगाही पुरवा गांव के पास बादा-नरैनी सड़क मार्ग जाम कर दिया था।

इस दौरान नरैनी के उपजिलाधिकारी अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा था कि कोलावल रायपुर खदान के आवंटी ने आवंटित सीमा से हटकर अवैध खनन किया है और अवैध तरीके से नदी में अस्थायी पुल बनाया है। इस पर जल्दी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक सप्ताह गुजरने के बाद भी कार्रवाई करना तो दूर की बात रही, अवैध खनन में पाबंदी तक नहीं लग पाई।

सोशल मीडिया में अवैध खनन के मामले में हमीरपुर जिलाधिकारी की कार्रवाई की तारीफ और बांदा जिलाधिकारी की अनदेखी पिछले कई दिनों से बनी हुई है, जिनमें तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

हमीरपुर जिलाधिकारी की सराहना करते हुए भाजपा के तिंदवारी विधायक बृजेश प्रजापति ने जिलाधिकारी बांदा को चार दिन पूर्व एक पत्र लिखकर अवैध खनन के खिलाफ हमीरपुर जैसी कार्रवाई करने के लिए भी कहा, लेकिन यह पत्र भी उनके कार्यालय में आखिरी सांसें ले रहा है।

बांदा के जिलाधिकारी हीरालाल ने गुरुवार को कहा कि ‘अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए संबंधित उपजिलाधिकारियों को पुलिस दल के साथ पैमाइश (नाप) कराने को लिखा गया है। कोलावल रायपुर खदान की पैमाइश अब तक न किए जाने पर नायब तहसीलदार से जवाब-तलब किया गया है।

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के विपरीत किसी को भी खनन की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सामाजिक संगठन ‘विद्याधाम समिति’ के मुखिया और जल सत्याग्रह आंदोलन की अगुआई करने वाले राजाभइया सिंह ने सीधे तौर पर जिलाधिकारी के ऊपर तो कोई आरोप नहीं लगाया, मगर उनकी रहस्यमय चुप्पी पर सवाल जरूर उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि एनजीटी, पर्यावरण और वन विभाग की रोक के बावजूद नदियों की जलधारा से अवैध खनन क्यों हो रहा है? समझ से परे है।

सिंह ने सवाल किया कि बांदा और हमीरपुर के लिए शासन स्तर से अलग-अलग खनन नीति बनी है क्या? जल सत्याग्रह के एक सप्ताह बाद भी कोलावल रायपुर खदान के मामले में कार्रवाई न होने पर भाजपा के तिंदवारी विधायक बृजेश प्रजापति ने कहा कि जब तक जिले में शैलेंद्र सिंह जैसे खनिज अधिकारी पदस्थ हैं, तब तक कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हमीरपुर जिलाधिकारी की तर्ज पर बांदा प्रशासन भले ही देर-सबेर प्रभावशाली कार्यवाही करे। लेकिन, फिलहाल हमीरपुर जिलाधिकारी की कार्रवाई बांदा जिलाधिकारी के लिए कर्तव्य निष्ठा का आईना माना जा रहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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