आईएल एंड एफएस मामला : एजेंसियों ने निवेशकों से ठगी के लिए फर्जी रेटिंग दी

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आईएल एंड एफएस संकट में सबसे बड़े खलनायक क्रेडिट रेटिंग एजेंसिंया रही हैं, क्योंकि उन्होंने आईएल एंड एफएस फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएफआईएस) के वाणिज्यिक पत्रों और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर्स (एनसीडीज) को लगातार सकारात्मक और प्रभावशाली रेटिंग प्रदान की, जबकि कंपनी की वित्तीय हालत खस्ताहाल थी। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी गई जांच रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।

दस्तावेजों से पता चलता है कि कई निवेशकों ने आईएल एंड एफएस की वित्तीय इकाई के एनसीडी और वाणिज्यिक पेपरों की खरीद की थी, क्योंकि उन्होंने यह फैसला रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी गई उच्च रेटिंग को देखकर किया था।

केनरा एचएसबीसी ओबीसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी अनुराग जैन ने आईएफआईएन के वाणिज्यिक पेपरों में करीब 30 करोड़ रुपये एसीडीज में करीब 10 करोड़ रुपये का निवेश किया था। उन्होंने बताया कि उनका निवेश का फैसला मुख्य तौर से सीएआरई और आईसीआरए जैसी रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग से प्रभावित था।

एसएफआईओ के दस्तावेजों में जैन के हवाले से कहा गया, “आईएल एंड एएस/आईएफआईएन के पेपरों में निवेश मुख्य तौर पर सीएआरई और आईसीआरए जैसी रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग से प्रभावित होकर किया गया, जिन्होंने कंपनी को अपनी श्रेणी में सबसे उच्च रेटिंग प्रदान की।”

दस्तावेजों के मुताबिक, साल 2013 से 2018 के अवधि के दौरान जिन एजेंसियों ने आईएफआईएन को रेटिंग प्रदान की थी, उनमें सीएआरई रेटिंग्स, आईसीआरए लि., इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च और ब्रिकवर्क रेटिंग्स इंडिया शामिल हैं।

आईएफआईएन के एनसीडीज में करीब 115 रुपये के निवेश के साथ ही ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने भी आईएफआईएन को मिली रेटिंग के कारण धोखा खाया है।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के डीजीएम दुष्यंत कुमार बागोती ने कहा, “ऋण प्रतिभूतियों के चयन का आधार वित्तीय, क्रेडिट रेटिंग और बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम यील्ड होता है। आईएफआईएन एक एनबीएफसी है और उसकी वित्तीय, क्रेडिट रेटिंग और बेहतर यील्ड के आधार पर, दो रेटिंग एजेंसियों, सीएआरई और इंडिया रेटिंग्स द्वारा आवंटित लगातार एएए रेटिंग के आधार कुछ फंडों द्वारा समय-समय पर लगातार इसमें निवेश किया गया।”

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के प्रबंधक ज्ञानरंजन ने कहा, “अगर रेटिंग एए या उससे ऊपर है तो पुनर्भुगतान में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।”

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने आईएफआईएन के एनसीडीज में 62 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

रेटिंग एजेंसियों को लेकर एसएफआईओ ने दस्तावेज में कहा, “सभी चारों रेटिंग एजेंसियों ने आईएफआईएन के दीर्घकालिक और अल्पकालिक इंस्ट्रमेंट्स को उच्चतम रेटिंग प्रदान की, जबकि कंपनी का प्रबंधन लगातार असली तथ्य छुपा रहा था और धोखाधड़ी में लिप्त था।”

दस्तावेज में कहा गया कि इसलिए आईएल एंड एफएस की चल रही जांच के सिलसिले में आईएफआईएन को उच्च रेटिंग देने वाली इन रेटिंग एजेंसियों की भी भूमिका की आगे जांच की जानी चाहिए।

इससे पहले आईएल एंड एफएस के मामले में कंपनी के ऑडिटर्स की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे और क्रेडिट रेटिंग कंपनियां संदेह के दायरे में है।

वहीं, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) पहले से ही रेटिंग एजेसिंयों के परिचालन की कड़ी निगरानी कर रहा है और दोनों नियामकीय निकाय इन एजेंसियों के बिजनेस मॉडल की छानबीन कर रही हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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