आईआईटी मद्रास ने देश का पहला माइक्रोप्रोसेसर शक्ति विकसित किया

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आईआईटीएम) के शोधकर्ताओं ने देश का पहला माइक्रोप्रोसेसर शक्ति विकसित किया है, जो कि मोबाइल कंप्यूटिंग समेत अन्य डिवाइसों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

आईआईटीएम के मुताबिक, शक्ति माइक्रोप्रोसेसर कम-शक्ति के वायरलेस सिस्टम्स और नेटवर्किं ग सिस्टम्स में प्रयोग किया जा सकता है, जिससे संचार और रक्षा क्षेत्रों में आयातित प्रोसेसर्स पर निर्भरता घटेगी।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ये माइक्रोप्रोसेसर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं और इसका अन्य देशों में भी इस्तेमाल हो सकता है।

आईआईटीएम ने कहा कि शक्ति परिवार के माइक्रोप्रोसेसरों का निर्माण इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के चंडीगढ़ स्थित सेमी-कंडक्टर लेबोरेटरी (एससीएल) में किया गया है, जो पूरी तरह से भारत में डिजायन किया गया और मेड इन इंडिया ‘आरआईएससी वी माइक्रोप्रोसेसर’ है।

आईआईटीएम के कंप्टूयर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के रिकंफिगरेबल इंटेलीजेंट सिस्टम्स इंजीनियरिंग (आरआईएसई) लेबोरेटरी के मुख्य शोधार्थी प्रो. कामकोटी वीजीनाथन ने कहा, “डिजिटल इंडिया के आगमन के साथ, कई एप्लिकेशंस है, जिसके लिए कस्टमाइजेबल प्रोसेसर्स कोर्स की जरूरत होती है। एससीएल चंडीगढ़ का 180एनएम फैब्रिकेशन फैसिलिटी देश के अंदर इन कोर्स के विनिर्माण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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