आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने गीले कपड़ों से बिजली पैदा की

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक वातावरण में सुखाए जा रहे कपड़ों से बिजली पैदा करने का एक अनोखा नजरिया विकसित किया है। शोधकर्ताओं ने निरंतर जारी वाष्पीकरण के बीच लवणयुक्त पानी की निर्देशित गतिविधि के माध्यम से बिजली पैदा करने के लिए सेल्यूलोस आधारित फैब्रिक नेटवर्क में स्थित अत्यंत क्षुद्र चैनलों का इस्तेमाल किया है। यह प्रक्रिया बहुत हद तक जीवित पौधे में पानी के परिवहन की प्रक्रिया के समान है।

मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट के अग्रणी शोधकर्ता सुमन चक्रवर्ती ने इस प्रक्रम को समझाते हुए कहा, “इस मामले में सुव्यवस्थित सेल्यूलोस से बना पहनावे का कपड़ा कैपिटलरी कार्य द्वारा रेशेदार छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए लवणयुक्त पानी की गति के लिए माध्यम का काम करता है। इस प्रक्रिया में विद्युत विभव भी शामिल होता है।”

शोधकर्ताओं ने सुदूर गांव में धोबियों के द्वारा सुखाए जा रहे बड़ी तादाद में कपड़ों (करीब 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले करीब 50 कपड़ों) का इस्तेामल करके पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।

शोधकर्ताओं ने करीब 24 घंटे में 10 वोल्ट विद्युत आवेश पैदा किया। इस प्रकार संचित बिजली से एक सफेद एलईडी एक घंटा तक जल सकती है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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