आईआईएम-बेंगलुरू के छात्रों ने जेएनयू छात्रों पर हमले की निंदा की

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भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरू (आईआईएम-बी) के छात्रों ने बड़ी संख्या में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर पांच जनवरी को हुए हमले की निंदा की और उनके साथ एकजुटता दिखाते हुए एक बयान जारी किया। 268 छात्रों और कुछ शिक्षकों द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है, “जेएनयू के शिक्षकों और छात्रों पर हमला, भारत की बुनियाद पर हमला है। हम इसकी कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और जेएनयू के साथ खड़े हैं।”

छात्रों ने कहा कि भारत ने हमेशा बहस को महत्व दिया है और युवाओं के बीच बहस को बढ़ावा दिया है, और इसके जरिए समाज एक खुले और सहिष्णु समाज का निर्माण हुआ है।

बयान में कहा गया है, “हमारे गणराज्य की बुनियाद मानव के बुनियादी सम्मान और विविधता में एकता पर टिकी हुई है।”

बयान में आगे कहा गया है, “आईआईएम-बेंगलुरू के हम सदस्य अपनी निजी क्षमता से जेएनयू परिसर में हमले की कड़ी निंदा करते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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