क्या सिनेमाघर खुलने के बाद भी पहले जैसे होंगे हालात?

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दोस्तों ये तो आप जानते हैं कि पिछले काफी समय से देश में कोरोना वायरल लॉकडाउन चल रहा है। हालांकि अब जून के शुरूआती दिनों से देश की सरकार ने कुछ रियायत जरूर दे दी है। लेकिन अब भी कई जगहों पर लॉकडाउन जैसे हालात बने हुए है। इस लिस्ट में सबसे पहले नाम महाराष्ट्र का आता है जहां पर लॉकडाउन को 31 जुलाई तक आगे बढ़ाया है क्योंकि वहां पर कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। लेकिन देश में ​मिली छूट के साथ बाकी इंडस्ट्री की तरह बॉलीवुड इंडस्ट्री का काम भी शुरू हो चुका है लेकिन अभी महाराष्ट्र सरकार ने सिर्फ इनडोर शूटिंग की इजाजत ही मिली है जिसकी वजह से काम शुरू हो गया है जिससे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को थोड़ी राहत का सांस मिली है। अब वहीं कई सारे बॉलीवुड के प्रोड्यूसर्स और मेकर्स अपनी अपनी फिल्मों की रिलीज का ऐलान भी कर दिया है।

जी हां आपको बता दें कि फिल्म सूर्यवंशी की रिलीज का ऐलान हो गया है जो इसी दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके अलावा क्रिसमस के मौके पर रणवीर सिंह की फिल्म 83 की भी रिलीज का ऐलान हो गया है। वहीं खबरें है कि सलमान खान भी अपनी फिल्म राधे को दिवाली के मौके पर रिलीज करने का विचार कर रहे है। इस वक्त हर मेकर्स और प्रोड्यूसर्स में अपनी अपनी फिल्मों को रिलीज करने की होड़ लगी हुई है। जबकि अभी ये बात साफ नहीं है कि देश में सिनेमाघर कब तक खुलेंगे और ना ही सरकार की तरफ से कोई खास सुगबुगाहट ही सुनाई दी है।

एक बार खबर सामने आई थी कि एक केंद्रीय मंत्री ने मेकर्स को दिलासा दिया है कि उम्मीद है जल्द ही सिनेमाघर खुल जाएंगे। चले मान लेते है कि आगामी अगस्त की आखिर तक या सितंबर में सिनेमाघर खुल जाएंगे। लेकिन अब यहां पर सवाल ये उठता है कि अगर सिनेमाघर खुले तो क्या पहले जैसे हालात होंगे? मतलब सिनेमाघर जब खुलेंगे तो जाहिर है कि लोगों की भीड़ कम ही दिखाई देगी। इसे अलावा सिनेमाघरों में सोशल ​डिस्टेंसिंग को फॉलो किया जाएगा मतलब एक सीट छोड़कर ही दूसरा व्यक्ति बैठेगा ऐसे में दर्शक सिर्फ 50 प्रतिशत ही पहुंच पाएंगे।

इसके अलावा लोग अपनी जान की परवाह करेंगे या फिर फिल्म देखने जाएंगे फिर चाहे कितने ही बड़े स्टार की फिल्म क्यों ना रिलीज हो। वहीं जो लोग लॉकडाउन में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हो वो पहले अपनी बेसिक जरूरतें पूरी करेंगे या फिल्म देखेंगे। जिन लोगों को ओटीटी प्लेटफार्म की लत लग गई हो वो क्या सिनेमाघर में फिल्म देखने जाएंगे। ऐसे कई सारे सवाल खड़े होते है। जिनका जवाब सिर्फ यही है कि सिनेमाघर खुलने के बाद भी हालात पहले की तरह सामान्य नहीं होंगे। ऐसे में बड़े बजट की फिल्मों को इस साल रिलीज करना शायद घाटे का सौदा है। समझारी तो उन मेकर्स ने दिखाई जिन्होंने अपनी फिल्मों को अगले साल तक के लिए टाल दिया है क्योंकि तब तक देश के हालात सामान्य होने की पूरी उम्मीद लगाई जा रही है। ये कहा जा सकता है कि इस साल अगर बड़ी फिल्में रिलीज हुई तो सिर्फ घाटा ही होगा या फिर अपना बजट ही निकालने में फिल्म कामयाब हो पाएगी जितनी फिल्म से उम्मीद लगाई जा रही उतना कारोबार शायद ही कर पाए।

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