आईडीबीआई के रेपो-लिंक्ड खुदरा ऋण 1 अक्टूबर से होंगे प्रभावी

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सरकारी आईडीबीआई बैंक ने सोमवार को कहा कि रेपो-लिंक्ड खुदरा ऋण 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगे। आईडीबीआई बैंक ने पहले कहा था कि वह रेपो-लिंक्ड खुदरा ऋण और वाहन ऋण लांच करेगी, जो 10 सितंबर से प्रभावी होंगे।

हालांकि, आरबीआई द्वारा पिछले हफ्ते जारी निर्देशों को देखते हुए बैंक ने यह समय सीमा बढ़ा दी है। आरबीआई ने कहा था कि सभी नए फ्लोटिंग रेट वाले खुदरा ऋणों (निजी खंड में) में एक्सटर्नल बेंचमार्क से 1 अक्टूबर तक जोड़ना होगा।

आईडीबीआई ने एक बयान में कहा, “आईडीबीआई बैंक ने 30 अगस्त 2019 को घोषणा की थी कि वह 10 सितंबर 2019 से रेपो रेट-लिंक्ड होम और ऑटो लोन शुरू करेगा। हालांकि आरबीआई द्वारा जा 4 सितंबर 2019 को जारी निर्देशों के आलोक में सभी नई फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन्स (निजी खंड) को एक्सटर्नल बेंचमार्क से 1 अक्टूबर 2019 से जोड़ा जाएगा। इसलिए रेपो-लिंक्ड होम लोन और ऑटो लोन में देरी होगी।”

आरबीआई का रेपो रेट ऐसा ही एक एक्सटर्नल बेंचमार्क है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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