आइस स्केटिंग संघ का तीन दिवसीय कोचिंग कैम्प शुरू

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आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसएआई) ने आइस पर बच्चों को परफॉर्म करने में मदद करने के लिए मंगलवार को यहां एम्बिएंस मॉल में स्थित देश के पहले स्किट रिंग में तीन दिवसीय नेशनल कोचिंग कैम्प शुरू किया। 13 अक्टूबर तक चलने वाले कैम्प में बच्चों की प्रतिभा को बाहर निकालने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आईएसएआई कैम्प के बाद यहां 15वां राष्ट्रीय आइस स्केटिंग चैम्पियनशिप का आयोजन किया जाएगा। चैम्पियनशिप के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से 80 बच्चों का चयन किया जाएगा जो इसमें भाग लेंगे।

कैम्प के लिए लड़कों और लड़कियों को अंडर 10, 10 -13, 13 -15, 15-17 और 17 से अधिक आयु वर्ग में बांटा गया है। एथलीट अपने फिगर स्केटिंग (कलात्मक) में स्पिन, जम्प, फ्लेक्सिबिलिटी और पोस्चर्स (लचीलापन और आसन) का प्रदर्शन करेंगे।

देश के भविष्य और स्केटर्स की सहायता के लिए आईएसएआई ने नेशनल चैंपियन निश्चय लूथरा को राष्ट्रीय कोच का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। लूथरा सोलो और पेअर आइस फिंगर स्केटिंग में नौ बार स्वर्ण पदक जीत चुके है।

इस अवसर पर आईएसएआई के अध्यक्ष आर. के गुप्ता ने कहा कि उनकी टीम देश में आइस स्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए जोरदार तरीके से लगी है ताकि ज्यादा-से-ज्यादा एथलीटों को इसमें हिस्सा लेने का मौका मिल सके और वे विश्व में अच्छा प्रदर्शन कर सके।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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