1,198 कार्पोरेट कंपनियों पर आईबीसी की कार्रवाई : अधिकारी

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सितंबर के अंत तक कुल 1,198 कार्पोरेट कंपनियों पर दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत समाधान प्रक्रिया की कार्रवाई चल रही है, जिसमें से 52 का समाधान चल रहा है, तथा 212 कंपनियों की बिक्री (लिक्वीडेशन) की जा रही है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

भारतीय दिवाला और दिवालियापन संहिता बोर्ड (आईबीबीआई) के पूर्ण कालिक सदस्य नवरंग सैनी ने कहा, “सितंबर के अंत तक कुल 1,198 कार्पोरेट कंपनियों पर दिवाला और दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत समाधान प्रक्रिया की कार्रवाई चल रही है, जिसमें से 52 का समाधान हो गया है।”

बोर्ड के मुताबिक 212 मामलों में कंपनियों की बिक्री की जा रही है और 118 पर अपील जारी है या समीक्षा हो रही है।

उन्होंने मर्चेट्स चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित सत्र में कहा, “ज्यादातर मामले बीआईएफआर के हैं, इसलिए कंपनी की बिक्री के मामले ज्यादा सामने आया है। हम समाधान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

कार्पोरेट दिवालिया समाधान के तहत औसत वसूली करीब 50 फीसदी है, वहीं कुछ मामलों में 65 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक भी है।

आईबीबीआई के मुख्य महाप्रबंधक आई. श्रीकारा राव ने कहा कि करीब 192 मामले अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिबूयूनल (एनसीएलटी) में दाखिल किए गए हैं, जोकि धोखाधड़ी, कम मूल्यांकन, कागजातों में छेड़छाड़ से जुड़े हैं।

सितंबर के अंत तक कुल 269 कार्पोरेट कंपनियों ने खुद ही बिक्री की पहल की है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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