कांस्य पदक को जीत न मानकर अपनी मेहनत जारी रखूंगा : पुनिया

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भारत के लिए यहां जारी विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के 65 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम करने वाले बजरंग पुनिया ने कहा कि वह इस पदक को जीत न मानकार आने वाली चुनौतियों का सामना करेंगे। पुनिया ने शुक्रवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक के मुकाबले में मंगोलिया के तुल्गा ओचिर को एक करीबी मुकाबले में 8-7 से पराजित किया।

उन्होंने ट्वीट किया, “कुछ हार ऐसी सीख सिखा जाती है जो जीतने पर शायद कभी न मिले। इस कांस्य पदक को जीत न मानकर, मैं आने वाली चुनौतियों के लिए इसे एक स्मारिक बनाकर प्रेरित होता रहूंगा।”

पुनिया ने उन सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने उनका समर्थन किया। उन्होंने ट्वीट किया, “मैं आप सभी को तह-ए-दिल से धन्यवाद करता हूं। मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली मानता हूं। जो लगातार आप सभी ने मुझे प्यार और समर्थन दिया है। इस उपलब्धि का हकदार हर वो इंसान है जिसने इस सपने को साकार करने के लिए अपना योगदान दिया है।”

ओचिर के खिलाफ हुए मुकाबले में पुनिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। एक समय वह 0-6 से पीछे थे लेकिन बाद में उन्होंने वापसी करते हुए पदक अपने नाम कर लिया।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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