गोसलिंग के अच्छा खाना पकाने पर जिंदा हूं : इवा मेंडेस

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अभिनेत्री इवा मेंडेस ने आखिरकार इस बात का खुलासा किया कि पाक कला में कोई कौशल न होने के बावजूद भी वह किस तरह से जिंदा हैं। इस बात का खुलासा अभिनेत्री ने उस वक्त किया जब इंस्टाग्राम पर उनके द्वारा मंगलवार को साझा की गई एक तस्वीर पर उनके किसी प्रशंसक ने कमेंट किया।

तस्वीर में इवा को दिल के आकार के एक मैकरून (कुकी) का आनंद लेते देखा जा सकता है जिसे किसी केटरिंग कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में उनके फैन ने लिखा, “मैकरूंस बहुत पसंद है, ये लोग और क्या-क्या बनाते हैं? क्या आप और रयान कुकिंग करते हो?”

इसके जवाब में इवा ने कहा, “रयान गजब के शेफ और बेकर हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वास्तव में, मैं बिल्कुल भी मजाक नहीं कर रही, लेकिन मुझे नहीं पता कि खाना कैसे पकाते है। मैं ज्यादा से ज्यादा सब्जियों को उबाल लेती हूं, जूस निकाल लेती हूं और चावल बना लेती हूं। रयान अच्छे कुक हैं और इसी की बदौलत मैं जिंदा हूं।”

इवा और रयान काफी लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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