हुंडई मोटर इंडिया की बिक्री 4.6 फीसदी बढ़ी

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वाहन दिग्गज हुंडई मोटर इंडिया की बिक्री में अक्टूबर में 4.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें घरेलू बिक्री के साथ ही निर्यात का भी योगदान रहा।

कंपनी के मुताबिक, अक्टूबर में उसने कुल 65,020 वाहनों की बिक्री की, जबकि साल 2017 के इसी महीने में कंपनी ने 62,139 वाहनों की बिक्री की थी।

कंपनी ने बताया कि अक्टूबर में उसकी घरेलू बिक्री में 4.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और कुल 52,001 वाहनों की बिक्री हुई, जबकि साल 2017 के इसी महीने में घरेलू बाजार में कंपनी ने कुल 62,139 वाहनों की बिक्री की थी।

कंपनी के निर्यात में अक्टूबर में 3.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जोकि 13,019 वाहनों की रही, जबकि पिछले साल अक्टूबर में हुंडई ने कुल 12,551 वाहनों का निर्यात किया था।

हुंडई मोटर इंडिया के बिक्री प्रमुख विकास जैन ने कहा, “हुंडई ने अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दर 4.9 फीसदी हासिल की है और कुल 52,001 वाहनों की बिक्री हुई है। हमने देश का पसंदीदा पारिवारिक कार- ऑल न्यू सैंट्रो को लांच किया है जिसकी भारी मांग देखी जा रही है। यह उद्योग में नया बेंचमार्क स्थापित करेगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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