पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट ना करा कर इस पति ने संदेश ही नहीं महानता का काम किया है

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जयपुर। शादी एक परंपरा ही नहीं, ज़िंदगी को आगे बढ़ाने और उसे फिर एक नई मोड़ देने का एक फैसला होता है। शादी से पहले शादी के लिए और शादी के बाद तक लोग काफी जतन करते हैं। कई तरह की बातें होती हैं और कई तरह के सपने भी होते हैं, जिसे पूरा किये जाने के लिए देखा और सोचा जाता है।

पर, आज भी भारत के कई जगहों पर शादी और शादी की परंपराएं ऐसी हैं, जिसे सुनकर रौंगटे खड़े हो जाएं, लेकिन ये समाज का हिस्सा है और समाज इन अंधविश्वासों को मानता ही नहीं है, बल्कि अपना कर बैठा है।

पुणे का पिंपरी गांव। गांव है तो छोटा सा, पर इस गांव की एक ऐसी परंपरा थी, जो कि किसी भी महिला के लिए घोर अपमानित कर देने जैसा है। ये परंपरा ऐसी है जिसे गांव के पुरुषों के अलावा गांव की महिलाएं भी मानती रही हैं, जबकि ये है तो महिलाओं के खिलाफ ही।

पिंपरी गांव में कंजरभट समुदाय के लोग रहते हैं। कंजरभट समुदाय के लोग महाराष्ट्र के कई जगहों पर रहते हैं। इस समुदाय में एक घटिया सी परंपरा है, वो भी शादी को लेकर। इस समुदाय में शादी की रात दुल्हन को अपना वर्जिनिटी टेस्ट देना होता है।

वर्जिनिटी टेस्ट देने का तरीका भी काफी अजीब और गंदे कारनामे के जैसा होता है। शादी की बाद वाली रात को पति-पत्नी को एक सफेद चादर दे दी जाती है। इस सफेद चादर पर दोनों को रात बितानी होती है और इसके बाद अगली सुबह ये चेक किया जाता है कि चादर पर खून के धब्बे आए या नहीं।

खून के धब्बे आने का मतलब हो जाता है कि पत्नी उस रात से पहले तक वर्जिन थी। अगर खून के धब्बे ना आए तो ये रिश्ता तोड़ दिया जाता है। रिश्ता तोड़ दिये जाने का मतलब शादी के एक दिन बाद ही लड़की को तलाक देकर पति उसकी सारी खुशियों को छीन लेता है।

अब इस परंपरा को तोड़ा है पुणे के पिंपरी गांव के विवेक तमाईचिकर और ऐश्वर्या भट्ट ने। इन दोनों ने 12 मई को शादी की और शादी के बाद विवेक ने अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट ना करा कर इस परंपरा को तोड़ दिया।

इस शादी में दोनों कपल ने अपने इंविटेशन कार्ड पर वर्जिनिटी टेस्ट का पुरजोर विरोध किया था और शादी में आकर लोगों को इस प्रथा के विरुद्ध हो जाने की भी अपील की थी। विवेक ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में पढ़ाई की है और व्हाट्सअप पर Stop the V-ritual का कैंपेन भी चलाया।

पर, विवेक के लिए ये सब आसान नही था। वर्जिनटी टेस्ट की प्रथा को दूर करने के लिए विवेक ने काफी संघर्ष किया। विवेक जब 10 साल के थे, तब उन्होंने अपने एक रिश्तेदार की शादी में इसी मामले को लेकर मारपीट होते हुए देखा था और तभी ये फैसला ले लिया था कि वो इस प्रथा का विरोध करेंगे। एक बार अपने चाचा के साथ उनकी इस मसले पर बहस हो गई थी और उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था।

विवेक को अपनी पत्नी ऐश्वर्या को इस काम के लिए मनाना भी नहीं पड़ा, क्योंकि वो खुद भी इसके खिलाफ थीं। शादी के दिन भी दोनों कपल को काफी संघर्ष पड़ना पड़ा। समाज के गुंडों से बचने के लिए दोनों को पुलिस और बाउंसर्स का सहारा लेना पड़ा। इस परंपरा का विरोध करने की वजह से विवेक को पहले भी धमकियां सुननी पड़ी थीं।

ये एक विवेक और ऐश्वर्या थे, जिन्होंने जागरुकता फैलाने के लिए अपनी जान तक को खतरे में डाला। इनके एक प्रयास से आगे शादी करने वाले कई लोगों की आंखें खुल जाएंगी। लेकिन, ये तो एक प्रथा थी, जिसका विरोध किया गया। पर, उन सारी प्रथाओं का क्या जो कि आज भी समाज की वजह चलती हुई आ रही हैं।

इन सबमें ज़्यादातर महिलाओं के साथ ही अत्याचार होता है। अब वो चाहे गरीब हो, अमीर हो, या फिर पढ़ी लिखी ही क्यों ना हो। जैसे कि दहेज़ को लोगों ने आज के समय में अपना ही लिया है और इसके खिलाफ कानून होने के बावजूद आज भी खुले-आम दहेज़ लिया और दिया जाता है। किसी के पति के मर जाने के बाद भी आज ये एक रिवाज़ है कि विधवा पत्नी को सादे कपड़े पहनने होते हैं। अगर विवेक और ऐश्वर्या समझदार नहीं होते तो इस समाज के लोग इस वर्जिनिटी टेस्ट को शादी का एक हिस्सा ही मान लेते या फिर मान चुके थे।

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