सैकड़ों साल से पहाड़ से लटका है ये मंदिर, अनोखा है इसके निर्माण का तरीका

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दोस्तों, आज तक आपने पता नहीं कितनी ही ऐसी रहस्यमयी इमारते देखी होंगी जिसको देखने के बाद में आप लोग आश्चर्य से रह गए होंगे, मगर आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि पहाड़ से उलटा लटका हुआ हैं । अपनी इसी अनोखी बनाबट के कारण यह मंदिर आज पूरी दुनिया में रहस्य का कारण भी बना हुआ है।

आपको बता दें कि, यह मंदिर चीन के शांझी में हेंग माउंटेन पर बसा हैं । इस मंदिर को हैंगिंग मॉनैस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि यह मंदिर करीब 1500 साल पहले बनाया गया था इस मंदिर को ऐसा बनाने के पीछे कारण यह है कि इस मंदिर का निर्माण करने वाले इस बाढ़ से बचाना चाहते थे । इस मंदिर के सबसे पास दटोंग नाम का एक शहर है ।

यह मंदिर केवल अपने स्थान ही नहीं बल्कि तीन चीनी पारंपरिक धर्म बुद्ध, ताओ और कंफुशिवाद के मिलाप आदि के लिए भी दुनियाभर में मशहूर हैं । इस मंदिर की संरचना को ओक क्रॉसबीम्स में फिट किया गया है । इस मंदिर की मुख्य सहायक संरचना आधार स्तम्भ के भीतर छिपी हुई है ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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