‘Kaho Naa Pyar Hai’ के 21 साल, ऋतिक रोशन ने दी यह प्रतिक्रिया..

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बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन ने 21 साल पहले आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ के साथ इंडस्ट्री में कदम रखा था। इस मौके को अपने प्रशंसकों के लिए और खास बनाने के लिए अभिनेता ने गुरुवार को अपने बेटों के साथ अपना एक वीडियो साझा किया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में ऋतिक अपने बेटे ह्रेहान और हिृधान के साथ साइकिल की सवारी का लुफ्त उठाते नजर आ रहे हैं।

ऋतिक ने इसके कैप्शन में हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा है, “हैशटैगडैडीकूल।” जबकि स्क्रीन पर ‘हाई ऑन लव’ लिखा नजर आ रहा है।

ऋतिक की इस डेब्यू फिल्म को उनके पिता राकेश रोशन ने निर्देशित किया है, जिसमें अभिनेता के विपरीत अमिशा पटेल को कास्ट किया गया था।

हाल ही में ऋतिक ने 10 जनवरी को अपने जन्मदिन पर अपनी अगली फिल्म ‘फाइटर’ का ऐलान किया, जिसमें वह दीपिका पादुकोण के साथ काम करते नजर आएंगे। सिद्धार्थ आनंद इस फिल्म के निर्देशक हैं, जिन्होंने साल 2019 में आई ऋतिक की हिट फिल्म ‘वॉर’ बनाई थी।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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