अंतरिक्ष के सन्नाटे भरे काले अंधेरे में ब्लैक होल का कैसे लगाते है पता

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जयपुर। वैज्ञानिकों ने कई तरह की तकनीकों को जन्म दिया है जिसकी बदौलत आज हम कई तरह की जानकारी को हासिल करते है। इस तरह से जैसा कि हम जानते हैं कि ब्लैक होल प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते हैं। जो प्रकाश इन्हे दिया जाता है वो इनके भी अवशेषित कर लेते है। तो इनको देखना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। खगोलविदों के लिए पहले एक गम्भीर समस्या थी कि इनको कैसे देखा जाये। लेकिन अब खगोलविदों ने इस समस्या का भी समाधान ढूढ़ निकाला है।

वैज्ञानिक जॉन मिशेल के अनुसार ब्लैक होल अदृश्य होने पर भी अपने निकट स्थित पिंडों पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव डालता है और उनको परेशान करते हैं। फिर खगोलविदों ने शोध आकाश में स्थित उन युग्म तारों का प्रेक्षण कर पता लगाया कि जो एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण से बंधकर एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। वैज्ञानिकों ने कल्पना की कि आकाश में दो तारें एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं और उनमें से एक तारा अदृश्य है व दूसरा तारा दृष्टिगोचर है। इस स्थिति में दृश्य तारा अदृश्य तारे की परिक्रमा करेगा।

लेकिन आपको बता दे कि गलती से भी अदृश्य तारे को ब्लैक होल ना लें। इसी तरह से खगोलविद दृश्य तारे के कक्षा से सबंधित खगोलीय गणनाओं के आधार पर उसके द्रव्यमान से सबंधित जानकारी एकत्र कर अदृश्य तारे के द्रव्यमान के बारे में पता सकता है। वैज्ञानिक मानते है कि यदि उसका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से तीन-चार गुना अधिक होता है, तो अत्यधिक सम्भावना है कि वह अदृश्य तारा एक ब्लैक होल है। आपको बता दे कि ब्लैक होल के अस्तित्व को सिद्ध करने का एक अन्य उपाय भी है। जिसके उपाय से ब्लैक होल को पहचान सकते है।

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