किस तरह से समीर शर्मा ने सत्यजीत दुबे को एक रोल दिलाने में मदद की थी

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अभिनेता सत्यजीत दुबे ने कहा है कि वह हमेशा दिवंगत अभिनेता समीर शर्मा के कर्जदार रहेंगे क्योंकि करियर के शुरूआती दौर में समीर ने उन्हें एक किरदार दिलाने में उनकी मदद की थी। उस बात का जिक्र करते हुए सत्यजीत ने ट्वीट करते हुए कहा, “इन्फिनिटी मॉल में लैंडमार्क नामक एक बुकस्टोर में एक बार मैं उनसे एकाएक ही टकरा गया। उस वक्त मैं 18 साल का था और मुंबई में नया था। मैं उन्हें टेलीविजन में उनके किए गए काम की वजह से जानता था। मैं कहा, ‘हाय सर’, उन्होंने मुझसे पूछा, ‘क्या तुम एक्टर हो?’ मैंने हां कहा। इसके बाद उन्होंने जवाब में कहा कि ‘यहां सड़क के उस पार स्फीयर ओरिजिंस के नाम से एक टीवी प्रोडक्शन हाउस है, उन्हें तुम्हारे जैसे एक युवा शख्स की तलाश है, तुम वहां जाकर टेस्ट क्यों नहीं देते?’ मैंने उनसे कहा ‘धन्यवाद सर, मैं जरूर जाकर टेस्ट दूंगा’ और बदले में उन्होंने कहा, ‘ऑल द बेस्ट, उम्मीद करता हूं कि तुम्हें वह किरदार मिल जाएं’ और फिर हम अपने-अपने रास्ते चले गए।

सत्यजीत ने आगे कहा, “मैं तुरंत सड़क पार कर कास्टिंग डायरेक्टर से मिला, ऑडिशन दिया और किरदार को हासिल किया। यह कुछ उतना बड़ा नहीं था, छह दिनों का काम था और मुझे 18 हजार मिले थे लेकिन उन दिनों मेरे लिए यह बड़ी बात थी। यह एक महीने और वहां गुजारा करने में मेरी मदद की..समीर को इसके लिए शुक्रिया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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