हमारी आंख कितने मेगा पिक्सेल की होती है और कितना हम साफ देख पाते है

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जयपुर। मानव धरती पर सबसे प्रतिभाशाली जीव है क्योंकि उसमें देखने,सोचने,समझने और कार्य करने में संपूर्णत सक्षम है। इसको प्रतिभाशाली बनाने में सबसे ज्यादा योगदान मस्तिष्क और आँखों का है। आपको शायद पता नहीं होगा कि हमलोग एक त्रिआयामी संसार में रहते है और चौथा आयाम समय है पर समय के बारे में हमारी जानकारी अभी तक पूरी नहीं है। हमारी आँखे हमें सभी चीजों को त्रिआयामी छवि के रूप में देखाती है। यह एक प्रकाशीय यंत्र है जो फोटोग्राफिक कैमरे की तरह की व्यवहार करती है।

हम सब जानते है कि हमारी आँख में किसी तरह से एक तस्वीर बनती है जब प्रकाश किसी वस्तु से टकराकर हमारी दृष्टिपटल पर पड़ती है तो उस वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है बता दें कि रेटिना नेत्र का प्रकाश सुग्राही भाग है। दृक तांत्रिक यह रेटिना पर बनने वाले प्रतिविंब को संवेदनाओ द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचाने का कार्य करता है। हमारी आँख कैमरा के समान है लेकिन इसका सबसे बड़ा सवाल है कि कैमरे की क्षमता तो Megapixel हम बता सकते है लेकिन आँखे कितने Megapixel है इसका शायद हमें अंदाजा भी नहीं है।

आपको आश्चर्य होगा कि हमारी आँखे महज 1.5~2.0 MP के कैमरा के समान है। अभी के जो स्मार्टफोन के कैमेरे है वो 13MP,16MP या उससे भी अधिक मेगापिक्सेल से लैस होते है। 2MP में भी अपन इतना स्पष्ट कैसे देख पाते है इसका जवाब है हमारा परिष्कृत मस्तिष्क। हमारा मस्तिष्क सारे ब्लाइंड स्पॉट को भर देता है और हमारे समक्ष एक स्पष्ट त्रिआयामी छवि प्रस्तुत कर देता है। दिमाग इस कार्य को करने में बहुत ही सूक्ष्म समय लेता है

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