हरियाणा में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हुड्डा व शैलजा

0
138

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस की हरियाणा इकाई की अध्यक्ष कुमारी शैलजा के राजनीतिक संबंधों में कुछ खास गर्माहट नहीं रही है। मगर, अब राज्य के दोनों वरिष्ठ नेता 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा से सत्ता वापस हासिल करने के लिए अपने मतभेदों को एक तरफ रखते हुए एक साथ प्रयास कर रहे हैं। हरियाणा में 2014 के बाद से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हार का स्वाद चखने के बाद कांग्रेस ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए दलित नेता शैलजा को राज्य इकाई प्रमुख व हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का नेता नियुक्त किया।

तब से दोनों राज्य में एक साथ समन्वय के साथ चुनावी अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को लगता है कि विभिन्न गुटों में बंटी राज्य इकाई में यह दोनों नेता सबसे अच्छे सहयोगी हैं।

हुड्डा के पास राज्य की बहुत अधिक जिम्मेदारी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता हुड्डा ने ही पार्टी नेतृत्व पर दबाव डाला कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अशोक तंवर की जगह शैलजा को लिया जाए और एक दलित के स्थान पर दूसरे दलित चेहरे को ही राज्य में पार्टी की कमान सौंपी जाए।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता हुड्डा और शैलजा के साथ फिर से सक्रिय हो गए हैं।

पार्टी नेता ने कहा कि हुड्डा को चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने मजबूत नेतृत्व का स्पष्ट संकेत दिया है जो राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले आवश्यक था।

एक अन्य पार्टी नेता ने कहा कि हुड्डा, जो 2004 से 2014 तक दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, उनके कंधों पर बहुत अधिक जिम्मेदारी है।

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस को हरियाणा में हार का सामना करना पड़ा, चाहे वह 2014 का विधानसभा चुनाव हो या 2019 का लोकसभा चुनाव।

पार्टी नेता ने कहा कि हुड्डा को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह रोहतक और सोनीपत के अपने पारंपरिक गढ़ों में पार्टी को पुनर्जीवित करने में सक्षम हों, जहां भाजपा द्वारा 2019 के लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की गई।

हुड्डा खुद सोनीपत लोकसभा सीट से हार गए थे, जबकि उनके बेटे और तीन बार सांसद रहे दीपेंद्र सिंह हुड्डा की रोहतक सीट से हार हुई।

पार्टी के नेताओं को हालांकि लगता है कि चार बार लोकसभा चुनाव सहित आठ चुनावों में जीत हासिल करने वाले हुड्डा की राह आसान नहीं है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleभारत में 5जी की जबरदस्त मांग : एरिक्सन
Next articleइस दिग्गज ने फिर की वकालत स्टीव स्मिथ को ऑस्ट्रेलियाई टीम का कप्तान बनाने की
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here