समलैंगिकता अपराध नहीं, ‘सामाजिक, मनोवैज्ञानिक समाधान की जरूरत’ : आरएसएस

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने गुरुवार को कहा कि वह समलैंगिकता का समर्थन नहीं करता है क्योंकि इस संबंध में सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर समाधान निकाले जाने की जरूरत है, लेकिन साथ ही संगठन सर्वोच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से सहमत है कि सामान लैंगिक संबंध अपराध नहीं है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने एक बयान में कहा, “सर्वोच्च न्यायालय की तरह, हम इसे अपराध नहीं मानते हैं। समान लिंग के साथ शादी और संबंध प्राकृतिक मानदंडों के अनुरूप नहीं है। इसलिए, हम ऐसे संबंधों का समर्थन नहीं करते हैं। भारतीय समाज में भी ऐसे संबंधों को स्वीकारने की परंपरा नहीं रही है।”

उन्होंने कहा, “मानव सामान्यत: अनुभवों से सीखता है, इसलिए इस मामले को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर देखे जाने की जरूरत है।” उन्होंने यह बयान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद दिया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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