हॉलीवुड स्टार बर्ट रेनॉल्ड्स का निधन

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हॉलीवुड मेगास्टार बर्ट रेनॉल्ड्स का निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। सीएनएन ने अनुभवी अभिनेता के एजेंट टॉड आइजनर के हवाले से कहा, ‘स्मोकी एंड द बैंडिट’ और ‘बूगी नाइट्स’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके अपने हैंडसम लुक के लिए लोकप्रिय बर्ट रेनॉल्ड्स का गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

उन्हें हॉलीवुड का सेक्स सिंबल माना जाता था। वह निर्देशन में भी हाथ आजमा चुके थे। उन्होंने फ्लोरिडा में बर्ट रेनॉल्ड्स इंस्टीट्यूट फॉर फिल्म एंड थिएटर की स्थापना की थी।

वह एक्शन से लेकर हास्य सभी तरह की शैली की फिल्में कर चुके हैं। 1996 की फिल्म ‘स्ट्रिपटीज’ में डेविड डिल्बेक काफी चर्चित हुआ था। हालांकि, यह फिल्म फ्लॉप रही थी लेकिन उन्हें इसमें उनकी कॉमेडी टाइमिंग के लिए काफी सराहा गया था। रेनॉल्ड्स ने हाल के वर्षो में कई फिल्मों और टीवी शो में काम किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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