हॉकी : जापान को हरा फाइनल में भारत

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भारतीय पुरुष टीम ने शुक्रवार को एफआईएच सीरीज फाइनल्स के सेमीफाइनल में एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता जापान को 7-2 से मात दे फाइनल में जगह बना ली है।

इस जीत के साथ ही भारत ने अगले साल जापान में होने वाले ओलम्पिक खेलों के क्वालीफायर्स में जगह पक्की की। शनिवाक को होने वाले फाइनल में भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा।

जापान ने हालांकि शुरुआत अच्छी करते हुए दूसरे मिनट में ही गोल कर दिया था। जापान के लिए केंजी किटाजाटा ने पहला गोल किया। हरमनप्रीत सिंह ने सातवें मिनट में गोल कर भारत ोक बराबरी दिलाई और यहां से फिर भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हरमनप्रीत ने यह गोल पेनाल्टी कॉर्नर पर किया।

वरुण कुमार ने फिर 14वें मिनट में शानदार फील्ड गोल कर भारत को 2-1 से आगे कर दिया। इसी स्कोर के साथ भारत ने पहले क्वार्टर का अंत किया। 20वें मिनट में कोटा वाटानाबे जापान के लिए गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर किया लेकिन इसके बाद जापान सिर्फ गोल खाती रह गई।

तीन मिनट बाद रमनदीप सिंह ने 23वें मिनट भारत को एक गोल की बढ़त दिला दी जिसे 25वें मिनट में हार्दिक सिंह ने दोगुनी कर दिया। 37वें मिनट में रमनदीप ने अपना दूसरा गोल किया।

गुरसाहिबजीत सिंह ने 42वें और विवेक सागर ने 47वें मिनट में गोल कर जापान की वापसी मुश्किल कर दी।

इस जीत के साथ भारत ने ओलम्पिक क्वालीफायर्श में जगह पक्की कर ली है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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