रामलाल की जिंदगी में चमत्कारी चश्मे ने भरे रंग

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अनपढ़ आदमी की जिंदगी

रामलाल (डॉक्टर से): ‘डॉक्टर साहब! चश्मा लगाने के बाद मैं पढ़ तो ठीक से सकूंगा न।

डॉक्टर (रामलाल से): हां.. हां., बिलकुल।

रामलाल: ‘तो फिर ठीक है, वरना अनपढ़ आदमी की जिंदगी भी कोई जिंदगी है।’

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जब संता के घर आए डाकू…

आधी रात को संता के घर डाकू आए।

संता को जगाकर पूछा: यह बताओ कि सोना कहां है?

संता (गुस्से से): इतना बड़ा घर है कहीं भी सो जाओ। इतनी छोटी बात के लिए मुझे क्यों जगाया!

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बस की सीट के लिए लड़ पड़ी लड़कियां

दो लड़कियां बस में सीट के लिए लड़ रही थीं।

कंडक्टर ने कहा, क्यों लड़ रही हो। जो उम्र में बड़ी हो बैठ जाए।

बस फिर क्या था, दोनों पूरे रास्ते खड़ी रहीं।

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