हिन्दी दिवस :- बच्चों को सिर्फ अँग्रेजी ही नहीं दे हिन्दी भाषा का भी ज्ञान , जरूरी मातृ भाषा से उनका खास परिचय भी

आज के समय में बच्चों की शिक्षा में अँग्रेजी पर बहुत ज्यादा ज़ोर दिया जा रहा है ।बच्चों का दाखिला बड़े बड़े अँग्रेजी मीडियम स्कूलों में करवाया जाता है ।

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जयपुर । आज के समय में बच्चों की शिक्षा में अँग्रेजी पर बहुत ज्यादा ज़ोर दिया जा रहा है ।बच्चों का दाखिला बड़े बड़े अँग्रेजी मीडियम स्कूलों में करवाया जाता है । जहां पर सुबह से शाम बस बच्चों को अँग्रेजी में पढ़ाना और उनकी भाषा पर ही ज़ोर दिया जाता है । जमाने के साथ चलना बहुत ही अच्छी  बात है  पर क्या पर उस जमाने के साथ  साथ हमको हमारी मातृ भाषा का महत्व खो देना अच्छा है ।

हिन्दी हमारी मातृ भाषा है । जिंसने पूरे जहां में अपना ढंका बजाया है । आज भी हमको इंडियन से ज्यादा हिन्दुस्तानी के नाम से जाना जाता है । इतना ही नहीं आज जब बच्चे अँग्रेजी भाषा की और ज़ोर दे रहे हैं । उनके साथ बहुत सारी कमियाँ है । जैसे उनकी अँग्रेजी भी इतनी ज्यादा अच्छी नहीं होती है जितनी की हिन्दी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की होती है । ना ही उनकी किसी और विषय में पकड़ आची होती है ।

आज हम आपको एक कड़वी सच्चाई से रूबरू करवाते हैं । यदि आप किसी हिन्दी मीडियम के छात्र के साथ अँग्रेजी माध्यम के छात्र के साथ कोई कोंपीटीशन या कोई टेस्ट करवाते हैं तो आपको हिन्दी मीडियम के छात्र के टेस्ट में गलतियों की आशंका कम देख्ब्ने को तो मिलती है साथ ही उनके दिमाग का विकास भी ज्यादा अच्छा होता है ।

हिन्दी का हमारे जीवन में खास महत्व है , हमारे देश के जीतने भी सरकारी काम है वह आज भी हिन्दी भाषा में ही किए जाते हैं । 80 % जनता आज भी हिन्दी भाषी है । हिन्दी की वजह से ही हिन्दी सिनेमा का भी सारी दुनिया में खासा नाम है , तो हिन्दी की वजह से ही रवीन्द्रनाथ टेगौर महादेवी वर्मा , हरीवंश राय बच्चन जी , सुमित्रानंदन पंत और भी कई महान कवि हमारे दिल में आज भी जिंदा है ।

हिन्दी ने सिर्फ हमारे देश ही नही बल्कि शिकागो में भी हमारे देश का नाम किया है । स्वामी विविकानंद जी ने अपना प्रथम भाषण हिन्दी में ही शिकाओ में दिया था और हिंदुस्तान का परचम लहराया था । हिन्दी है तो हम है ,  वतन है हिंदुस्तान हमारा  , यह हमारी मातृ भाषा ही नहीं हमारी हिन्दुस्तानी होने की पहचान भी है इसे खोये नहीं । अपने बच्चों को इससे परिचय करवाए ।

हिन्दी बोलने से ,हिन्दी लिखने से हिन्दी पढ़ने से शर्म नहीं बल्कि गर्व से इस भाषा को अपनाए। क्या आपने कभी स्पेनिश को अपनी भाषा को छोड़ते हुए देखा है , क्या जापानी को अपनी भाषा को छोड़ कर किसी और भाषा को अपनाते देखा है , क्या चीनी को अपनी भाषा को छोड़ कोई और  भाषा अपनाते देखा है , क्या आपने जर्मन को अपनी जर्मन भाषा छोड़ कोई और भाषा अपनाते देखा है , अमेरिकी को अपनी भाषा का प्रसार करते देखा है पर क्या उसको कभी कोई और भाषा अपनाते देखा है ? इन सभी का जवाब आपको सिर्फ ना में मिलेगा । तो फिर क्यों हिदुस्तानी अपनी हिन्दी भाषा को छोड़ इन भाषाओं को अपना रहा है ? यह हमारे लिए गर्व नही  शर्म की बात है की हम हमारे देश की भाषा का विकास करने की जगह उसका दमन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियो को भी ऐसा करने पर मजबूर कर रहे हैं । हिन्दी पर गर्व कीजिये शर्म नही और अपने बच्चों को भी इसका हिस्सा बनाइये । क्योंकि जिस अँग्रेजी को आप बहुत कूल समझते हैं ना बाहरी देश वाले आपको फूल समझते हैं की इनको अपने देश की भाषा का भी ज्ञान नहीं है ।

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