हिमाचल प्रदेश : आचार संहिता के दौरान 4626 लीटर शराब जब्त

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स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के दृष्टिगत आदर्श चुनाव आचार संहिता के दौरान पुलिस, आबकारी तथा आयकर विभाग के उड़न दस्तों द्वारा की गई नाकेबन्दी के दौरान बुधवार को 4626 लीटर शराब, बीयर व लाहण के अतिरिक्त 0.004 किलोग्राम हेरोइन तथा 0.656 किलोग्राम चरस जब्त की गई। यह जानकारी मुख्य निर्वाचन कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बुधवार को यहां दी।

उन्होंने बताया कि पुलिस के पास बुधवार को 4 लाईसेंसशुदा हथियार जमा हुए तथा असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त 8 व्यक्तियों की पहचान की गई जबकि धारा 107/116 के तहत 8 व्यक्तियों को बाउंड किया गया। इसके अतिरिक्त 11 व्यक्तियों को गैर-जमानती वारंट जारी किए गए और 11 मामलों का निष्पादन किया गया।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की बुधवार को उनके कार्यालय में आम जनता से 8 नई शिकायतें प्राप्त हुई जबकि मंगलवार तक जिलों में इस तरह की 10 नई शिकायतें प्राप्त हुईं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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